सऊदी अरब के जाज़ान में मस्जिद पर हुआ हमला, क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से आम जनजीवन प्रभावित

खाड़ी देशों में क्षेत्रीय तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है और 13 सितंबर 2026 को सऊदी अरब के जाज़ान इलाके में एक बड़ा हमला हुआ। अल-तुवाल गवर्नरट में एक प्रोजेक्टाइल सीधे मस्जिद पर आकर गिरा जिसके कारण दो लोग बुरी तरह घायल हो गए और आसपास की कई इमारतों, वाहनों तथा मस्जिद को भारी नुकसान पहुंचा। सऊदी सिविल डिफेंस की टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास किया। रियाद सरकार ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है और इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
यमन सीमा पर बढ़ा तनाव और मिसाइल हमले
दूसरी तरफ हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारे ने दावा किया कि यमन की ताकतों ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स का इस्तेमाल करके नजरान स्थित शरूरा सैन्य बेस को निशाना बनाया। उनके अनुसार इस हमले में हथियारों के डिपो और कमांड सेंटर्स पर सटीक निशाना लगाया गया। यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब हूती गुठ ने यमन के लाल सागर तट के पास के इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली। मोखा बंदरगाह, धुबाब और बाब अल-मदब जलडमरूमध्य के पास के द्वीपों पर हूती सेना का कब्जा हो गया है। ईरान ने इन सभी सैन्य फायदों को एक दैवीय जीत करार दिया है।
सऊदी अरब की जवाबी कार्रवाई और तेल अड्डों पर असर
इस लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए सऊदी अरब ने भी आक्रामक रुख अपनाया है और पिछले 48 घंटों के भीतर सात प्रांतों में कुल 129 हवाई हमले किए हैं। हफ्ते की शुरुआत में आभा, खमीस मुशायत, जाज़ान और नजरान पर हुए हमलों में करीब 73 लोग घायल हो गए थे और तेल प्रतिष्ठानों में भीषण आग लग गई थी। इन हमलों के बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रियाद को अपना ईस्ट-वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन पूरी तरह से बंद करना पड़ा। इन सभी हमलों के पीछे ईरान से जुड़े नेटवर्क्स का हाथ बताया जा रहा है जिससे ऊर्जा आपूर्ति पर भी बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
कूटनीतिक बैठकें और ओमान के प्रयास
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद अल नाहयान के बीच एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय कूटनीतिक मुलाकात हुई। ओमान की तरफ से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बातचीत कराने की कोशिश की जा रही है लेकिन बहरीन ने इस बैठक में शामिल होने से साफ मना कर दिया। ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका देश कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगा और उन्होंने क्षेत्र में अमेरिका की गतिविधियों की जमकर आलोचना की। इस पूरे संघर्ष की वजह से खाड़ी क्षेत्र के तेल गलियारों और बाब अल-मदब चोक पॉइंट की स्थिरता पर बहुत बड़ा सवालिया निशान लग गया है।