Yemen News: हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के मोखा पोर्ट पर किया कब्जा, सऊदी अरब की बढ़ी चिंता।

यमन में चल रहे संघर्ष से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ हूती विद्रोहियों ने लाल सागर पर स्थित बेहद अहम और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मोखा पोर्ट पर अपना नियंत्रण हासिल कर लिया है। इस बात की जानकारी बीबीसी की रिपोर्ट के जरिए सामने आई है, जिसमें सैन्य सूत्रों और चश्मदीदों के हवाले से यह बताया गया है कि अंसार अल्लाह के नाम से पहचाने जाने वाले इन विद्रोहियों ने सऊदी अरब समर्थित सरकारी ताकतों से यह प्रमुख बंदरगाह शहर छीन लिया है। इस इलाके के हाथ से निकल जाने के बाद अब ईरान समर्थित यह समूह उस बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से केवल 75 किलोमीटर की दूरी पर आ गया है, जो एशिया और यूरोप को आपस में जोड़ने वाले मुख्य व्यापारिक मार्ग का दक्षिणी प्रवेश द्वार माना जाता है।
मध्य पूर्व के संघर्ष में बड़ा बदलाव और सऊदी अरब की स्थिति
मोखा पोर्ट पर हुए इस कब्जे को मध्य पूर्व के चल रहे संघर्ष में एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इस पूरी घटना के बाद से क्षेत्रीय राजनीति में सऊदी अरब काफी अकेला पड़ता हुआ नजर आ रहा है। तमाम तरह के पुराने रक्षा समझौतों और वार्ताओं के बावजूद, पाकिस्तान ने इस मौजूदा संघर्ष में सऊदी अरब को किसी भी तरह की सैन्य सहायता देने से साफ इनकार कर दिया है। खाड़ी देशों के बीच कूटनीति के मोर्चे पर यह घटनाक्रम बहुत अहम माना जा रहा है, जिससे इलाके में नई तरह की रणनीतिक हलचल तेज हो गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो और अमेरिकी हथियारों की चर्चा
इस बंदरगाह के कब्जे के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हुआ, जिसने इंटरनेट पर एक अलग ही बहस को जन्म दे दिया। इस वायरल फुटेज में एक हूती लड़ाकू सैनिक सऊदी बलों से कथित तौर पर छीने गए अमेरिकी निर्मित MRAP बख्तरबंद सैन्य वाहन के ऊपर जश्न मनाते हुए पोज देते हुए दिखाई दे रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने सऊदी अरब की सैन्य तैयारियों पर तंज कसा और अमेरिकी करदाताओं के पैसों के इस्तेमाल की तीखी आलोचना की। ऑनलाइन यूजर्स ने अमेरिकी टैक्सपेर्स को बहुत ही तंज भरे लहजे में धन्यवाद दिया और इसे हूती विद्रोहियों के पास बढ़ते हुए हथियारों और वाहनों का नया संग्रह बताया। इस पूरी स्थिति से यह साफ पता चलता है कि ज़मीनी स्तर पर किस तरह के हालात बने हुए हैं और आम जनता से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इन सैन्य उपकरणों की मौजूदगी की किस प्रकार चर्चा हो रही है।