यमन में बड़ा संघर्ष, हूती विद्रोहियों ने मोखा बंदरगाह पर किया कब्जा, रेड सी की सुरक्षा खतरे में।

Praggya Singh sabal10 September 20263 min read35 viewsYemen
यमन में बड़ा संघर्ष, हूती विद्रोहियों ने मोखा बंदरगाह पर किया कब्जा, रेड सी की सुरक्षा खतरे में।

यमन में चल रहा गृहयुद्ध अब और ज्यादा खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां 10 सितंबर 2026 को हूती विद्रोहियों ने सामरिक रूप से बेहद अहम बंदरगाह शहर Mocha पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। इस बड़ी घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं, क्योंकि यह इलाका दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग रूट्स में से एक Bab al-Mandeb Strait के पास स्थित है। बंदरगाह के हाथ से निकलने के बाद, हूती लड़ाकों ने आगे बढ़कर Hays और Al-Khawkhah जिलों पर भी अपना कब्जा जमा लिया और लाल सागर में स्थित Zuqar तथा Hanish द्वीपों तक पहुंच गए हैं।

सरकारी बलों की रणनीतिक पीछे हटने की कार्रवाई

यमीनी सरकारी बलों के कमांडर और प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के उपाध्यक्ष मेजर जनरल Tareq Saleh ने मोखा से रणनीतिक रूप से पीछे हटने की पुष्टि की है। सरकारी सैनिकों ने दक्षिण की ओर Dhubab में फिर से संगठित होने के लिए यह कदम उठाया। उन्होंने इस पूरे हमले को ईरान द्वारा प्लान किया हुआ और समर्थित offensive बताया है, और यह भी जानकारी दी कि इस क्षेत्र की रक्षा करते समय सरकारी सेना को भारी जानमाल का नुकसान उठाना पड़ा है। अरब गठबंधन और प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के साथ मिलकर अब एक वैकल्पिक कमांड सेंटर स्थापित किया जा रहा है।

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हिंसा में वृद्धि और मिसाइल तथा ड्रोन हमले

दोनों पक्षों के बीच इस बार की भारी हिंसा की शुरुआत 3 सितंबर 2026 को हुई थी, जब हूती विद्रोहियों और सरकारी बलों के बीच भीषण झड़पें शुरू हुईं। हालांकि 7 सितंबर तक सरकार समर्थित सैनिकों ने Al-Jawf और Al-Bayda क्षेत्रों में कुछ इलाकों पर कब्जा करने का दावा किया था, जिसमें Al-Labanat मिलिट्री कैंप शामिल था। लेकिन स्थिति बहुत तेजी से बिगड़ी और हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दक्षिणी शहरों जैसे कि Khamis Mushait, Abha और Jazan पर ताबड़तोड़ मिसाइल और ड्रोन से जवाबी हमले शुरू कर दिए। सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, इन हमलों में 73 लोग घायल हो गए, जिसके बाद सऊदी क्षेत्रों में अस्थायी आपातकालीन चेतावनियां जारी करनी पड़ीं।

सऊदी गठबंधन के हवाई हमले और भविष्य की चेतावनी

हूती विद्रोहियों के इन हमलों के जवाब में सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 10 सितंबर को यमन के विभिन्न गवर्नरेट जैसे कि Taiz, Hodeida, Al-Jawf और Marib में लगभग 40 airstrikes किए। इससे पहले 9 सितंबर को हूती गुट ने दावा किया था कि सऊदी विमानों ने देश भर में 54 हमले किए थे। गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल Turki al-Maliki ने कहा कि हूती लगातार सऊदी के राष्ट्रीय संसाधनों और बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं, और उन्होंने यह साफ कर दिया कि गठबंधन देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी जिम्मेदारी के साथ जवाब देगा। दूसरी तरफ, हूती सैन्य प्रवक्ता Yahya Saree ने चेतावनी दी कि इन सऊदी हमलों का करारा जवाब दिया जाएगा।

आम जनजीवन पर असर और विश्लेषकों की राय

इस ताजा सैन्य तनाव के शुरू होने के बाद से अधिकारियों ने 500 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि की है, जिनमें ज्यादातर लोग लड़ाके हैं, और लगभग 20,000 लोग बेघर हो चुके हैं। रक्षा विश्लेषक Wolfgang Pusztai ने बताया कि मोखा पर नियंत्रण होने से अब हूतियों का यमन के लगभग पूरे लाल सागर तट पर अधिकार हो गया है, जिससे वे अपनी तोपखाने की मदद से अंतरराष्ट्रीय जहाजों को आसानी से डरा या धमका सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषक Muqbil Naji का कहना है कि इस समुद्री रास्ते पर कब्जा होने से हूतियों को यमन की सीमाओं से बाहर तक का बड़ा प्रभाव मिल जाता है। इस बीच, पाकिस्तान ने कहा है कि मक्का समझौते के तहत सैन्य हस्तक्षेप पर उसकी तरफ से अभी कोई बातचीत नहीं चल रही है, लेकिन जरूरत पड़ने पर भविष्य में कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित है। आबाद स्टडीज एंड रिसर्च सेंटर के चेयरमैन Abdul-Salam Mohamad का सुझाव है कि सरकार को हूतियों की स्थिति को कमजोर करने के लिए एक साथ कई मोर्चे खोलने चाहिए।

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