Red Sea Crisis: यमन के पेरिम द्वीप पर हौथी लड़ाकों का कब्जा, कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल.

Nura Basta12 September 20263 min read22 viewsYemen
Red Sea Crisis: यमन के पेरिम द्वीप पर हौथी लड़ाकों का कब्जा, कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल.

ईरान समर्थित हौथी (Houthis) बलों ने यमन के मोचा बंदरगाह और पेरिम द्वीप पर कब्जा कर लिया है। इस बड़े सैन्य कदम के बाद वैश्विक तेल परिवहन का एक और मुख्य मार्ग सीधे तौर पर खतरे की चपेट में आ गया है। इस पूरी सैन्य कार्रवाई को अंजाम देने में सिर्फ 36 घंटे का समय लगा, जिसमें हौथी लड़ाके अपने साथ बैलिस्टिक मिसाइलें और नावें लेकर तिहामा के मैदान में आगे बढ़े। इस अचानक हुए हमले के बाद सरकारी सैनिकों पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा और सऊदी अरब की तरफ से वादा किए जाने के बावजूद समय पर कोई हवाई सहायता नहीं मिल पाई। इस बात की जानकारी एक वरिष्ठ यमनी अधिकारी ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी U.S. Central Command को दी थी।

पेरिम द्वीप पर कब्जे से बढ़ी चिंता

लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच के मुख्य रास्ते पर स्थित पेरिम द्वीप अब पूरी तरह से हौथी नियंत्रण में है। इस ज्वालामुखी वाली चट्टान पर कब्जा होने के बाद से लाल सागर से स्वेज नहर की तरफ जाने वाले सभी समुद्री रास्ते छोटे हमलों के लिए असुरक्षित हो गए हैं। इस वजह से सऊदी अरब की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। ईरान के दबाव की वजह से हॉर्मूज जलडमरूमध्य से अपना तेल पहले ही लाल सागर के रास्ते भेजना शुरू किया था, लेकिन अब इस नए घटनाक्रम के बाद सऊदी अरब को एक नए तरह के नाकाबंदी का सामना करना पड़ रहा है। बाजार पर इसका असर तुरंत देखने को मिला है और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र के रास्ते होने वाले कुल ऊर्जा व्यापार का एक तिहाई हिस्सा अब खतरे में आ गया है। इसके अलावा इराक की तरफ से हुए एक ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब ने अपनी एक मुख्य पाइपलाइन को भी बंद कर दिया है।

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राजनीतिक और सैन्य स्तर पर बड़ी हलचल

इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और सैन्य हलकों में काफी तनाव बना हुआ है। एक पश्चिमी सूत्र ने बताया कि मोचा में मोर्चा संभाल रहे यमनी सैनिक अपनी कागजी ताकत के मुकाबले केवल 20 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रहे थे। पिछले गुरुवार को ही सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने सऊदी अधिकारियों के साथ बैठक की थी और खुफिया सहायता के लिए 100 से अधिक अमेरिकी सलाहकारों को तैनात किया गया था, लेकिन इसके बावजूद कोई हवाई हमला नहीं किया गया। सूत्रों से यह भी पता चला कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हवाई हमलों की अनुमति देने का अनुरोध किया था, जिसे ठुकरा दिया गया। दूसरी तरफ ईरान के सुप्रीम लीडर के एक सलाहकार ने इस बढ़त को एक बड़ी जीत बताया है।

सऊदी अरब के खिलाफ नाकाबंदी का ऐलान

यमन की सरकारी सेना ने इस तटीय इलाके को वापस पाने के लिए एक बड़े जवाबी हमले की योजना बनाने की बात कही है। हालांकि हौथी प्रवक्ता यह्या सारिया ने साफ कर दिया है कि उनका यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक हौथी नियंत्रित क्षेत्रों पर से सऊदी दबाव पूरी तरह से नहीं हटाया जाता। दक्षिणी ट्रांजिटशनल काउंसिल के अम्र अल-बिध ने कहा कि हौथी बिना किसी आधुनिक हथियार के भी इस जलडमरूमध्य का पूरा फायदा उठा सकते हैं। ओमान के सलालाह शहर में सोमवार को खाड़ी देशों के विदेश मंत्रियों और ईरान के विदेश मंत्री के बीच हॉर्मूज के समुद्री रास्ते को लेकर एक बैठक तय की गई है, लेकिन लाल सागर की इस नई जमीनी हकीकत ने कूटनीतिक प्रयासों को काफी उलझा दिया है। यह पूरी जानकारी CNN, Reuters, AP, Al-Monitor, Foreign Affairs, CGTN और यमनी आधिकारिक बयानों के आधार पर 12 सितंबर 2026 तक की रिपोर्ट से ली गई है।

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