Yemen Crisis: लाल सागर के बंदरगाहों पर हौथी विद्रोहियों का कब्जा, सऊदी समर्थित बलों के खिलाफ बढ़ा तनाव

Sushma Kumari11 September 20264 min read9 viewsYemen
Yemen Crisis: लाल सागर के बंदरगाहों पर हौथी विद्रोहियों का कब्जा, सऊदी समर्थित बलों के खिलाफ बढ़ा तनाव

लाल सागर के तटीय इलाकों में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जहां Houthi बलों ने इस हफ्ते बड़ी सैन्य सफलता हासिल करते हुए रणनीतिक बंदरगाह शहर मोचा पर कब्जा कर लिया है। इसके अलावा उन्होंने लाल सागर तट के पास स्थित Perim (Mayyun) Island जैसे अहम द्वीपों पर भी अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। यह पूरा सैन्य अभियान September 10 and 11, 2026 के बीच काफी ज्यादा तेज हो गया था, जिसके चलते तटीय शहर धुबाब और ग्रेटर व लेसर हानिश द्वीपों पर भी हौथी विद्रोहियों का कब्जा होने की बात सामने आ रही है। इन सभी गतिविधियों की वजह से ईरान समर्थित इस समूह को बाब अल-मदब जलडमरूमध्य पर अपनी सामरिक पकड़ मजबूत करने का बड़ा मौका मिल गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा हालात बेहद चिंताजनक बन गए हैं।

विस्थापितों की संख्या में भारी इजाफा और मौतों का सिलसिला

इस दोबारा भड़के संघर्ष की वजह से आम लोगों को बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ रही है, और September 3 के बाद से अब तक 11,400 households नए सिरे से विस्थापित हो चुके हैं। हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 72 hours के दौरान ही लगभग 18,500 people अपना घर छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। इसके साथ ही, हौथी गुट द्वारा सऊदी अरब के इलाकों पर किए गए हमलों में 73 civilian casualties हुई हैं, जबकि दूसरी तरफ इस पूरे इलाके में हैजा यानी कोलेरा की बीमारी भी तेजी से फैल रही है। इन तमाम हमलों और हौथी विद्रोहियों की लगातार आगे बढ़ती गतिविधियों का जवाब देने के लिए सऊदी नीत गठबंधन सेना ने पिछले 24 hours के दौरान 64 airstrikes को अंजाम दिया है। इन हवाई हमलों में एफ-15 और टाइफून लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया है, जिन्होंने ताइज, होदेइदाह, मारिब और अल-जावफ में स्थित हौथी ठिकानों को अपना मुख्य निशाना बनाया है।

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आधिकारिक बयान और कूटनीतिक मोर्चे पर हलचल

इस पूरे मामले पर बात करते हुए हौथी प्रवक्ता Mohammed Abdulsalam ने कहा है कि उनका यह पूरा सैन्य अभियान पूरी तरह से रक्षात्मक है और उन्होंने दावा किया कि लाल सागर में नौवहन सभी जहाजों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि केवल सऊदी जहाजों को इसमें शामिल नहीं किया गया है क्योंकि उन पर एक नया नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर दी गई है। दूसरी तरफ, यमन में संयुक्त राष्ट्र के दूत Abdullah al-Saadi, राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष Rashad al-Alimi और विदेश मंत्री Afrah al-Zouba ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से यह जोरों से अपील की है कि वे इन कार्रवाइयों की कड़ी निंदा करें और तुरंत हथियारों के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध यानी आर्म्स एम्बार्गो लागू करें। इसके अलावा, सऊदी क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman ने कथित तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump से यह अनुरोध किया था कि वे हौथिए के खिलाफ हमलों को अधिकृत करें, लेकिन अमेरिका ने इस मांग को पूरी तरह से ठुकरा दिया है और अमेरिकी अधिकारियों का यह साफ कहना है कि उनका फिलहाल सीधे तौर पर सैन्य हस्तक्षेप करने का कोई भी इरादा नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय चेतावनी और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराता खतरा

खुफिया और क्षेत्रीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ऐसा माना जा रहा है कि हौथी विद्रोहियों को सीधे तौर पर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। हालांकि ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार Mojtaba Khamenei ने इस कदम को एक शानदार और गूंजती हुई जीत बताया है, लेकिन वहीं दूसरी तरफ ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पाकिस्तान को यह संदेश भेजा है कि ईरान का हौथी विद्रोहियों पर सीधा नियंत्रण नहीं है। इस पूरी स्थिति पर नजर रखते हुए रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट यानी RUSI के विश्लेषक Baraa Shiban और जोखिम सलाहकार Brett Erickson ने गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अब हौथी विद्रोही होर्मुज जलडमरूमध्य के साथ-साथ इस दूसरे समुद्री चोकहोल्ड पर भी पूरी तरह से नियंत्रण पा चुके हैं, जिसकी वजह से वे अब वैश्विक ऊर्जा और तेल शिपमेंट के लिए बहुत बड़ा खतरा बन गए हैं। इस बढ़ते सुरक्षा संकट का सामना कर रहे सऊदी अरब ने गठबंधन प्रवक्ता Maj Gen Turki al-Malki के माध्यम से यह वचन दिया है कि वे अपनी संप्रभुता और अपने देश के व्यापारिक मार्गों की रक्षा पूरी दृढ़ता और अत्यंत संकल्प के साथ करेंगे।

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