ताइज में हूती बलों की घेराबंदी दूसरे महीने में दाखिल, 15 लाख लोग संकट में

यमन के ताइज शहर में हूती बलों की घेराबंदी के कारण 15 लाख लोग संकट में हैं। खाने-पीने और दवाओं की भारी किल्लत हो गई है।

Nura Basta4 November 20262 min read0 viewsYemen
ताइज में हूती बलों की घेराबंदी दूसरे महीने में दाखिल, 15 लाख लोग संकट में

ताइज (यमन): यमन के ताइज शहर में हूती बलों द्वारा की गई घेराबंदी अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुकी है, जिससे करीब 15 लाख निवासियों के लिए गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है। 4 नवंबर, 2026 को इस नाकेबंदी को 30 दिन पूरे हो गए हैं, जिसके कारण शहर में भोजन, पानी, ईंधन और चिकित्सा आपूर्ति जैसी बुनियादी चीजों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है।

यह घेराबंदी अक्टूबर की शुरुआत में तब और मजबूत हो गई जब हूती बलों ने अल-तूरबाह शहर पर कब्जा कर लिया। इस कदम से अदन को जोड़ने वाला मुख्य आपूर्ति मार्ग कट गया। इसके बाद 18 अक्टूबर को हूती बलों ने हयजत अल-अब्द सड़क को नुकसान पहुंचाने के लिए विस्फोटकों का इस्तेमाल किया, जिससे शहर की आबादी और भी अलग-थलग पड़ गई।

नाकेबंदी का सीधा असर आम जनता की जेब और जीवन पर पड़ा है। शहर में खाद्य पदार्थों की कीमतों में कम से कम 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कचरा संग्रहण सेवाएं ठप होने से सड़कों पर गंदगी का ढेर लग गया है और कई परिवारों व विस्थापित लोगों को खाना पकाने के लिए अब लकड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है।

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स्वास्थ्य सेवाएं भी पूरी तरह चरमरा गई हैं। अस्पतालों तक पहुंच में 60 से 70 प्रतिशत की गिरावट आई है। चिकित्सा केंद्रों ने ऑक्सीजन, दवाओं और ईंधन की भारी कमी की रिपोर्ट दी है। शहर के बाहर विशेष इलाज कराने वाले मरीज अब अंदर ही फंसे हुए हैं।

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने इस स्थिति को 'मध्यकालीन घेराबंदी' करार दिया है। उन्होंने 21वीं सदी में ऐसी स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र इस नाकेबंदी को जबरन तोड़ने में असमर्थ है। वहीं, घेराबंदी मामलों के विभाग के सलाह अहमद गालेब अल-मजीदी ने इसे 2014 में संघर्ष शुरू होने के बाद से किसी भी यमनी शहर पर थोपी गई सबसे विनाशकारी घेराबंदी बताया है।

इस घटना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा हो रही है। ह्यूमन राइट्स वॉच ने संकेत दिया है कि नागरिकों के लिए आवश्यक आपूर्ति रोकना युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है। यूरोपीय संघ ने इसे 'घृणित कृत्य' बताते हुए मानवीय गलियारा बनाने की मांग की है।

यूरोपीय संघ ने हूती बलों द्वारा हिरासत में लिए गए संयुक्त राष्ट्र के 70 कर्मचारियों को तत्काल और बिना शर्त रिहा करने की भी मांग की है। संघ का कहना है कि इन कर्मचारियों की हिरासत के कारण मानवीय सहायता पहुंचाना असंभव हो गया है।

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