सऊदी अरब पर बड़ा हमला, किंग खालिद एयर बेस पर ड्रोन और मिसाइल से स्ट्राइक.

खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के बीच यमन के हूती बलों ने सऊदी अरब पर बड़ा हमला किया है। 14 सितंबर 2026 को यमन के ईरान समर्थित हूती बलों ने खमीस मुशायत स्थित सऊदी अरब के किंग खालिद एयर बेस पर बड़े पैमाने पर हमला करने का ऐलान किया है। इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और कूटनीति के रास्ते लगभग बंद होते नजर आ रहे हैं। आम लोगों और कामगारों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है क्योंकि इसका असर सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर पड़ रहा है।
हूती प्रवक्ता का बड़ा दावा और हमलों का सिलसिला
हूती प्रवक्ता याह्या सारेई ने दावा किया है कि इस हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया। उनके मुताबिक इन हमलों में एयर बेस के हेंगर, रادار, रनवे और गोला-बारूद के गोदामों को निशाना बनाया गया और भारी नुकसान पहुंचाया गया। हूती पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई पिछले पांच दिनों में सऊदी अरब द्वारा किए गए 300 से अधिक हवाई हमलों के जवाब में की गई थी। हालांकि, रियाद सरकार या सेना की तरफ से इस सैन्य ठिकाने पर किसी भी तरह के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है.
ओमान में होने वाली अहम बैठक रद्द
यह हमला ठीक उसी दिन हुआ जिस दिन ओमान में ईरान और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) की एक उच्च स्तरीय बैठक होनी थी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए एक ट्रांजिट डील पर बातचीत करना था, जिसे फिलहाल टाल दिया गया है। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने जानकारी दी कि आपसी सहमति बनाने के लिए इस बैठक को स्थगित किया गया है। वहीं दूसरी ओर, ईरान के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने इस बैठक के रद्द होने के लिए रियाद को जिम्मेदार ठहराया है। बहरीन ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह इस शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होगा.
क्षेत्रीय तनाव और तेल बाजार पर असर
इस बीच, हूती बलों ने मोखा और पेरिम (मायुन) पर कब्जे के बाद ग्रेटर और लेसर हानिश द्वीपों पर भी अपना नियंत्रण हासिल कर लिया है। इन इलाकों पर कब्जे से बाब अल-मंडेल जलडमरूमध्य पर साल 2015 के बाद से हूतियों का सबसे मजबूत नियंत्रण हो गया है, जिससे सऊदी जहाजी गतिविधियों पर एक तरह से रोक लग गई है। इसके अलावा, पिछले शुक्रवार को हुए एक ड्रोन हमले के बाद ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को भी बंद करना पड़ा है। रियाद और वाशिंगटन का आरोप है कि इस हमले के पीछे इराक में सक्रिय ईरान समर्थित नेटवर्क का हाथ है। रॉयटर्स से बात करते हुए कारोबारियों ने बताया कि यानबु में तेल का स्टॉक केवल पांच से सात दिन ही चल सकता है, जिससे दुनिया भर की 4 प्रतिशत तेल आपूर्ति खतरे में पड़ गई है.
रॉयटर्स के सूत्रों के अनुसार, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के अधिकारियों ने मोखा पर कब्जे के दौरान मदद की थी और सऊदी ठिकानों पर हमलों को तेज करने की बात कही थी, हालांकि तेहरान का कहना है कि उसका हूती बलों पर कोई सीधा नियंत्रण नहीं है। इस लगातार बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 110 डॉलर पर पहुंच गई है। आम नागरिकों पर भी इस संघर्ष का बुरा असर पड़ रहा है। पिछले हफ्ते दक्षिणी सऊदी शहरों में 73 नागरिक घायल हुए हैं, जिजान में दो लोग जख्मी हुए और एक मस्जिद को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों के क्रू मेंबर की मौत की भी पुष्टि हुई है। ऐसे में खाड़ी देश इस गंभीर संकट से निपटने के लिए अलग-अलग कूटनीति अपना रहे हैं और वैश्विक ऊर्जा मार्ग पर मंडराता खतरा लगातार गहराता जा रहा है।