ताइज में हूतियों का कहर: 2,264 मानवाधिकार उल्लंघन दर्ज, भुखमरी का खतरा बढ़ा
यमनी नेटवर्क ने ताइज में हूतियों द्वारा 189 नागरिकों की हत्या और 324 अपहरण सहित हजारों उल्लंघनों का खुलासा किया है।

ताइज (यमन): यमनी नेटवर्क फॉर राइट्स एंड फ्रीडम ने एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि 1 सितंबर से 29 अक्टूबर 2026 के बीच हूती मिलिशिया ने ताइज प्रांत में 2,264 मानवाधिकारों का उल्लंघन किया है। "ताइज: किलिंग एंड सीज" नाम की इस रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान 189 नागरिकों की जान गई है, जिनमें 38 बच्चे और 27 महिलाएं शामिल हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 59 दिनों की इस अवधि में 281 लोग घायल हुए और 23 लोगों को गैर-कानूनी तरीके से मौत के घाट उतार दिया गया। इसके अलावा, हूतियों ने 324 लोगों का अपहरण किया और उन्हें जबरन गायब कर दिया। मिलिशिया ने 521 घरों पर छापेमारी की और 23 स्कूलों पर कब्जा कर उन्हें सैन्य बैरक के रूप में इस्तेमाल किया।
स्वास्थ्य सेवाओं को भी निशाना बनाया गया, जहां पांच एम्बुलेंस और तीन चिकित्सा केंद्रों पर हमलों में स्वास्थ्य कर्मियों के सात लोग मारे गए। ताइज के गवर्नर नबील शमसन ने 30 अक्टूबर को बताया कि 10 लाख निवासियों वाले इस शहर में घेराबंदी के कारण भुखमरी फैल रही है। उन्होंने कहा कि इस महीने शुरू हुए हमले के बाद से अब तक 271 लोग मारे गए हैं और 1,129 घायल हुए हैं।
गवर्नर शमसन के मुताबिक, हूतियों ने शहर के आखिरी बाहरी जल स्रोत पर कब्जा कर लिया है और कुकिंग गैस की आपूर्ति रोक दी है। दूसरी ओर, हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें "सऊदी द्वारा गढ़ा गया" बताया है। वहीं, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने मिलिशिया पर जहरीली गैस वाले प्रोजेक्टाइल इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
ह्यूमन राइट्स वॉच की शोधकर्ता निकु जाफरनिया ने कहा कि यह घेराबंदी युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकती है, क्योंकि इसमें भुखमरी को युद्ध के तरीके के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। मानवीय संकट तब और गहरा गया जब संयुक्त राष्ट्र के 71 कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया गया, जिसे यूएन ने संचालन के लिए "असहनीय" बताया है।
इधर, हूती संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया कि 30 अक्टूबर को पश्चिमी ताइज में सऊदी हवाई हमले में कम से कम 13 लोग मारे गए। वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने पुष्टि की है कि ताइज में सहायता पर निर्भर 6 लाख से अधिक लोगों तक उनकी पहुंच नहीं हो पा रही है और गेहूं का स्टॉक खत्म होने की कगार पर है।