बलूचिस्तान में सितंबर में 66 मौतें और 54 लोग लापता, HRCB की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2026 में 66 लोगों की हत्या हुई और 54 लोग जबरन लापता कराए गए।

बलूचिस्तान (पाकिस्तान): ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (HRCB) ने सितंबर 2026 की अपनी मासिक रिपोर्ट में क्षेत्र में मानवाधिकारों की गंभीर स्थिति का विवरण दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस एक महीने के दौरान बलूचिस्तान में 54 लोगों को जबरन लापता कराया गया और 66 लोगों की हत्या हुई।
लापता किए गए लोगों में तीन महिलाएं शामिल थीं, जिनमें एक सात साल की बच्ची भी है। इसके अलावा नौ किशोरों के भी गायब होने की खबर है। रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि मारे गए 66 लोगों में से 14 ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें पहले जबरन लापता किया गया था।
HRCB ने बताया कि दर्ज किए गए 54 लापता मामलों में से पांच पिछले महीनों की घटनाओं से जुड़े थे। गायब होने वालों में 51 पुरुष और तीन महिलाएं थीं। रिपोर्ट आने तक केवल 11 लोग वापस लौटे, जिनमें से चार की हिरासत में मौत की खबर मिली, जबकि बाकी अब भी लापता हैं।
अपहरण के तरीकों पर गौर करें तो सबसे ज्यादा मामले घरों पर छापेमारी के दौरान सामने आए, जिनकी संख्या 32 (59.3 प्रतिशत) रही। इसके बाद हिरासत के दौरान 20 मामले (37 प्रतिशत) और चेक-पोस्ट पर 2 मामले (3.7 प्रतिशत) दर्ज किए गए।
इन घटनाओं के लिए मुख्य रूप से फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिसके नाम 30 मामले (55.6 प्रतिशत) हैं। इसके अलावा खुफिया एजेंसियों के 15 मामले, काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) के पांच और कथित डेथ स्क्वॉड के चार मामले दर्ज हैं।
पेशागत तौर पर सबसे ज्यादा मजदूर (11 मामले), छात्र (7 मामले) और दर्जी (3 मामले) लापता हुए। इनके अलावा पशु चिकित्सक, चरवाहे, दुकानदार और ड्राइवर भी इस सूची में शामिल हैं। भौगोलिक तौर पर केच में सबसे ज्यादा 23 लोग गायब हुए, जबकि क्वेटा में 10 और पंजगुर में चार मामले दर्ज हुए।
रिपोर्ट में नाबालिगों और छात्रों के मामलों का विशेष जिक्र है। 3 सितंबर को केच के तुम्प इलाके से FC कर्मियों ने 14 साल के दो चरवाहों, कांबर और जुबैर को उठा लिया। उनके साथ हिरासत में लिए गए हुसैन का शव 14 अक्टूबर को मिला। परिवार का आरोप है कि उसे मारकर शव फेंक दिया गया। वहीं 19 सितंबर को सुराब से सलमान बलोच और माजिद बलोच नामक दो छात्रों (16 और 17 वर्ष) का अपहरण किया गया।
हत्याओं के आंकड़ों पर HRCB ने बताया कि सितंबर में मारे गए 66 लोगों में 59 पुरुष और सात महिलाएं थीं, जबकि आठ लोगों की पहचान नहीं हो सकी। इनमें 21 मौतें मुठभेड़ों में, 13 टारगेट किलिंग और 10 हिरासत में हुई हत्याएं बताई गई हैं।
शेलिंग, ड्रोन हमले, फर्जी मुठभेड़ और अंधाधुंध फायरिंग के पांच-पांच मामले दर्ज किए गए, जबकि दो मामलों में शव बरामद हुए। इन 66 मौतों में से 45 मामलों में FC को जिम्मेदार माना गया है। सबसे ज्यादा हत्याएं केच (15) में हुईं, जबकि खुजदार और मस्तुंग में 10-10 मौतें दर्ज की गईं।
सैन्य अभियानों में नागरिकों की मौत की खबरें भी रिपोर्ट में शामिल हैं। 8 सितंबर को मस्तुंग में सैन्य शेलिंग के कारण एक मां और उसकी तीन बेटियों समेत परिवार के चार सदस्य मारे गए। 10 सितंबर को खुजदार के वाध में FC छापेमारी के दौरान दो नाबालिगों समेत एक परिवार के चार लोगों की जान गई।
25 सितंबर को तुम्प में हुए एक ड्रोन हमले का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में बताया गया कि पिकनिक मनाने गए समीर, यासिर, जुबैर और दीदग नामक चार पुरुषों की मौत हो गई। ये लोग सीमा से जुड़े काम करते थे और उन्होंने अपनी यात्रा की जानकारी सेना को दी थी, लेकिन बाद में सुरक्षा बलों ने उन्हें आतंकवादी बताकर उनके शवों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं।
रिपोर्ट में उन लोगों के मामलों को भी दर्ज किया गया जो पहले गायब हुए थे और बाद में मृत पाए गए, जिनमें 17 सितंबर को मिले नादिल बलोच, अहसन बलोच और हसन के शव शामिल हैं।