खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लगाने पर पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने जताई नाराजगी और लोकतंत्र पर जताया खतरा
ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान ने खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर रूल और आपातकाल का विरोध करते हुए लोकतंत्र पर खतरे की चेतावनी दी है।

लाहौर (पाकिस्तान): ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP) ने खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर रूल लागू करने का कड़ा विरोध किया है। आयोग ने चेतावनी दी है कि इस कदम से लोकतांत्रिक संस्थाओं, बुनियादी अधिकारों और राजनीतिक आजादी को बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
HRCP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक प्रेस रिलीज में लोकतांत्रिक दायरे के सिमटने पर चिंता जताई है। आयोग ने कहा कि राजनीतिक गतिविधियों पर पाबंदी, मनमानी गिरफ्तारियां और सुरक्षा अभियानों का आम नागरिकों पर बुरा असर पड़ रहा है।
आयोग के मुताबिक यह स्थिति इसलिए ज्यादा चिंताजनक है क्योंकि खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का इकलौता ऐसा प्रांत है जहां विपक्ष की सरकार है। आयोग ने प्रांत के निर्वाचित मुख्य कार्यकारी की हिरासत को लोकतांत्रिक मानदंडों का गंभीर उल्लंघन बताया है।
HRCP ने पंजाब में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) से जुड़ी महिलाओं, निर्वाचित प्रतिनिधियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियों को व्यापक crackdown का हिस्सा बताया। आयोग ने आतंकवाद और उग्रवाद की निंदा की, लेकिन जोर दिया कि आतंकवाद विरोधी अभियान कानून के दायरे में होने चाहिए।
आयोग ने कहा कि सुरक्षा अभियानों का इस्तेमाल सामूहिक सजा देने या बुनियादी अधिकारों के उल्लंघन के लिए नहीं किया जाना चाहिए। सैन्य अभियानों से आम नागरिकों की जान जा सकती है और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हो सकते हैं, क्योंकि सिर्फ ताकत के दम पर स्थायी शांति नहीं लाई जा सकती।
GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin