महरंग बलोच को रिहा करे पाकिस्तान, ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन ने उनकी सेहत और ट्रायल पर जताया डर
ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन ने पाकिस्तान से महरंग बलोच को रिहा करने और उन्हें इलाज मुहैया कराने की मांग की है।

बलूचिस्तान (पाकिस्तान): न्यूयॉर्क स्थित ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (HRF) ने पाकिस्तानी अधिकारियों से डॉ महरंग बलोच को तुरंत रिहा करने और उन्हें सही इलाज मुहैया कराने की मांग की है। फाउंडेशन ने बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति और महरंग के खिलाफ चल रहे कानूनी ट्रायल की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
द बलूचिस्तान पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फाउंडेशन ने बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) की मुख्य आयोजक महरंग पर लगाए गए आतंकवाद के आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। HRF ने कहा कि जेल के भीतर चल रही सुनवाई में महरंग को केवल वीडियो लिंक के जरिए शामिल होने दिया गया, जिससे उन्हें अपने ट्रायल में प्रभावी ढंग से हिस्सा लेने का मौका नहीं मिला।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सुनवाई के दौरान पत्रकारों और बाहरी पर्यवेक्षकों को अंदर जाने से रोका गया। फाउंडेशन ने हिरासत में महरंग की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताते हुए उनकी रिहाई और चिकित्सा सहायता की मांग दोहराई है। 30 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक कैदियों के दिन से पहले HRF ने महरंग और उनके जैसे अन्य राजनीतिक कैदियों के प्रति एकजुटता जताई है।
महरंग बलोच को मार्च 2025 में एक शांतिपूर्ण धरने के दौरान गिरफ्तार किया गया था। यह धरना पिछले दिन एक प्रदर्शन में तीन लोगों की मौत के विरोध में आयोजित किया गया था। इसके बाद उन पर पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मुकदमा चलाया गया।
एक पत्र में अपनी आपबीती बताते हुए महरंग ने कहा कि उनके पिता को खोने और बचपन में हुड्डा जेल में उनसे मिलने जाने के अनुभवों ने उन्हें लापता लोगों की तलाश करने वाले परिवारों की मदद के लिए प्रेरित किया। उन्होंने लिखा कि BYC ने जबरन गायब किए गए लोगों और एक्स्ट्राज्यूडिशियल किलिंग के खिलाफ शांतिपूर्ण राजनीतिक संघर्ष का रास्ता चुना है, लेकिन संगठन के सदस्यों को गिरफ्तारियों, डराने-धमकाने और गायब किए जाने जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
महरंग ने पत्र में यह भी कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता केवल अपनी रिहाई नहीं है, बल्कि बलूचिस्तान के उन परिवारों का दुख है जिनके परिजन लापता हैं। उन्होंने लिखा कि जेल लोगों को कैद कर सकती है, लेकिन आजादी, गरिमा और न्याय की इच्छा को स्थायी रूप से नहीं दबा सकती।
क्विटा की एक आतंकवाद विरोधी अदालत ने 22 जून 2026 को महरंग और BYC नेता सिबगतुल्लाह शाहजी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। यह मामला ग्वादर में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान फ्रंटियर कोर के सैनिक शब्बीर अहमद की मौत से जुड़ा था। महरंग की कानूनी टीम और उनकी बहन नादिया बलोच ने इस फैसले को खारिज करते हुए इसे एक बिना चेहरे वाला ट्रायल बताया है।