अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का बड़ा कदम, 20 साल बाद ईरान को यूएन सुरक्षा परिषद में भेजा गया

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने बुधवार, 9 सितंबर 2026 को एक बड़ा फैसला लिया। एजेंसी ने परमाणु अप्रसार के नियमों को पूरा न करने पर ईरान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पास भेज दिया है। साल 2006 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब एजेंसी ने इस तरह का कोई कड़ा कदम उठाया है। यह पूरा मामला जून 2025 से चल रहा था, जब बोर्ड ने पहली बार ईरान द्वारा नियमों का पालन न करने की बात कही थी। इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 23 वोट पड़े, जबकि चीन, रूस और नाइजर ने इसके खिलाफ वोट किया और आठ देशों ने इस वोटिंग से दूरी बनाए रखी।
प्रस्ताव पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और ईरान का पक्ष
इस प्रस्ताव को पास कराने के लिए 35 देशों के बोर्ड में से दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी जो कि पूरा हो गया। इस फैसले के बाद एजेंसी के प्रमुख Rafael Grossi को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी जांच के नतीजे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और यूएन जनरल असेंबली दोनों के सामने रखें। साथ ही तेहरान से यह भी कहा गया है कि वह अपने सेफगार्ड समझौते का पालन जल्द से जल्द सुनिश्चित करे। पश्चिमी देशों के अधिकारियों का कहना था कि कुछ ऐसी जगहों पर यूरेनियम के निशान मिले थे जिन्हें घोषित नहीं किया गया था। इससे यह शक पैदा होता है कि वहां साल 2003 तक कोई गुप्त परमाणु हथियार कार्यक्रम चल रहा था। दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के दूत Gholamhossein Darzi ने इस प्रस्ताव को तकनीकी के बजाय पूरी तरह से राजनीतिक बताया। इसके बाद 11 सितंबर 2026 को उन्होंने यूएन महासचिव और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को एक पत्र लिखकर अमेरिकी प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की और इसे आर्थिक आतंकवाद करार दिया। वियना में यूएन के लिए ईरानी राजदूत Reza Najafi ने भी इसे एजेंसी की निष्पक्षता को प्रभावित करने वाला एक राजनीतिक हथियार बताया।
तेहरान में घरेलू प्रतिक्रिया और सैन्य चेतावनी
ईरान की राजधानी तेहरान में इस फैसले के बाद से हलचल काफी तेज हो गई है। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohsen Rezaei ने 10 सितंबर 2026 को इस फैसले को गैरकानूनी और बिना किसी तकनीकी आधार वाला बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कदम की वजह से ईरान परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने वाली संधि यानी NPT से बाहर भी आ सकता है। इसके अलावा देश के सांसदों ने भी कई तरह की सैन्य चेतावनियां दी हैं और कहा है कि वे भविष्य में IAEA के साथ सहयोग पर रोक लगा सकते हैं। ईरान के परमाणु प्रमुख Mohammad Eslami ने पहले ही साफ कर दिया था कि जिन परमाणु ठिकानों पर सैन्य हमले हुए हैं, वे तब तक निरीक्षकों की पहुंच से दूर रहेंगे जब तक युद्ध की स्थिति में कोई नया नियम नहीं बन जाता। सेंटर फॉर स्ट्रेटजी एंड इंटरनेशनल स्ट्डीज की रिपोर्ट के मुताबिक 10 सितंबर 2026 को नतांज की भूमिगत सुविधा में गतिविधियों में तेजी देखी गई। रूस और चीन के पास वीटो पावर होने के कारण इस बात की पूरी संभावना है कि ईरान पर आगे कड़े प्रतिबंध लगाने का रास्ता आसान नहीं होगा।