अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का बड़ा कदम, ईरान का परमाणु मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजा गया.

Aanya9 September 20263 min read36 viewsWorld
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का बड़ा कदम, ईरान का परमाणु मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजा गया.

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA के 35 सदस्यीय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने बुधवार, 9 सितंबर 2026 को एक अहम प्रस्ताव पास किया। इस प्रस्ताव के तहत ईरान के परमाणु मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पास भेज दिया गया है। पिछले 20 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है जब ईरान के खिलाफ इस तरह का बड़ा कदम उठाया गया है। इस प्रस्ताव को 23 वोटों के समर्थन से पास किया गया, जबकि आठ देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया और तीन देशों ने इसके खिलाफ वोट डाला। रूस, चीन और नाइजर ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। इस फैसले के पीछे मुख्य वजह यह बताई गई कि ईरान उन जगहों पर यूरेनियम के अंश मिलने के मामलों को स्पष्ट नहीं कर पा रहा है जहां की जानकारी उसने पहले नहीं दी थी। इसके अलावा ईरान लगातार अपने परमाणु नियमों का पालन करने से पीछे हट रहा है।

परमाणु ठिकानों की निगरानी पर संकट

आइएईए के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने जानकारी दी कि एजेंसी ने ईरान के 60 प्रतिशत तक शुद्ध किए गए यूरेनियम के भंडार पर अपनी पकड़ खो दी है। जून 2025 में हुए सैन्य हमलों से पहले यह भंडार कुल 440.9 किलोग्राम था। ग्रॉसी ने चेतावनी दी कि परमाणु ठिकानों तक पहुंच न मिलने की वजह से दुनिया के सामने बड़ा खतरा पैदा हो गया है। दूसरी तरफ ईरान के परमाणु प्रमुख मोहम्मद एस्लामी ने साफ कह दिया कि युद्ध जैसे हालातों को देखते हुए जब तक कोई नया नियम नहीं बनता, तब तक सैन्य हमलों में क्षतिग्रस्त हुए ठिकानों की जांच नहीं करने दी जाएगी। वियना में संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत रेजा नजफी ने इस प्रस्ताव को एक राजनीतिक हथियार बताया है।

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क्षेत्रीय तनाव और तेल टैंकरों पर हमले

डिप्लोमैटिक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच युद्ध जैसे हालात भी बद से बदतर होते जा रहे हैं। मंगलवार और बुधवार को अमेरिकी सेना ने खाड़ी देशों के पास फारस की खाड़ी और खर्ग द्वीप के नजदीक ईरान के पांच तेल टैंकरों को तबाह कर दिया। यह कार्रवाई तब की गई जब अमेरिकी युद्धपोत पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला हुआ था। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाया गया, तो अमेरिका ईरान के टैंकरों पर हमले जारी रखेगा। उधर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने दावा किया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो अमेरिकी जहाजों और आठ तेल टैंकरों समेत कुल 20 जहाजों को निशाना बनाया है, हालांकि अमेरिकी सेना ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इसके अलावा जॉर्डन ने अपने इलाके में बने अमेरिकी सैन्य अड्डे की तरफ आ रही ईरान की 18 मिसाइलों को हवा में ही रोक लेने की बात कही है।

तेल की कीमतों में उछाल और गल्फ देशों की स्थिति

इस मचे बवाल और युद्ध के माहौल के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं और दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गए हैं। ईरान ने कुवैत और बहरीन के पास मौजूद तेल टैंकरों के खिलाफ भविष्य में और भी कड़ी कार्रवाई करने की धमकी दी है। इस पूरे घटनाक्रम से खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और कामगारों के बीच चिंता का माहौल बन गया है, क्योंकि क्षेत्रीय अस्थिरता का सीधा असर आम जनजीवन और रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ने लगा है। खाड़ी देशों में यात्रा करने वाले यात्रियों और नौकरीपेशा लोगों को भी सुरक्षा के लिहाज से हालात पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके।

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