IAEA की चेतावनी, ईरान के परमाणु ठिकानों तक पहुंच न मिलने से दुनिया पर मंडराया बड़ा खतरा।

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था IAEA ने दुनिया के सामने एक बहुत बड़ी चिंता जाहिर की है। संस्था ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर रोक लगाने के कारण गंभीर सुरक्षा संकट पैदा हो गया है, जिसे तुरंत हल करने की जरूरत है। 1 सितंबर 2026 को जारी एक गोपनीय रिपोर्ट में, IAEA के महानिदेशक Rafael Mariano Grossi ने बताया कि एजेंसी की ईरान में परमाणु सामग्री तक पहुंच नहीं हो पा रही है और इसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
परमाणु सामग्री को लेकर जानकारी का नुकसान
एजेंसी ने बताया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जानकारी की निरंतरता टूट चुकी है। निरीक्षकों को ईरानी सुविधाओं में प्रवेश करने से रोक दिया गया है, जिससे परमाणु गतिविधियों की स्वतंत्र रूप से जांच करना नामुमकिन हो गया है। विशेष रूप से, IAEA ने कहा कि वह ईरान के पास मौजूद नियर-बॉम्ब-ग्रेड यूरेनियम के स्टॉक की स्थिति या उसके ठिकाने की पुष्टि नहीं कर पा रहा है। जून 2025 में हुए संघर्ष से पहले, यह अनुमान लगाया गया था कि ईरान के पास 440.9 किलोग्राम यूरेनियम था जिसे 60% शुद्धता तक समृद्ध किया गया था। अब एजेंसी के पास यह पता लगाने का कोई जरिया नहीं बचा है कि इस सामग्री का क्या हुआ और यह इस समय कहां रखी गई है।
ईरान का आधिकारिक जवाब और विरोध
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने 1 सितंबर 2026 को यह साफ किया कि ईरान का IAEA के साथ काम करने का तरीका तय नियमों के दायरे में ही है। उन्होंने किसी भी नए प्रोसेस की बात को सिरे से खारिज कर दिया। Baghaei ने Grossi समेत IAEA के अधिकारियों पर ऐसे बयान देने का आरोप लगाया जिनका फायदा विरोधी देश उठा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि एजेंसी को अपने नियमों का पालन करना चाहिए और किसी भी तरह के राजनीतिक दखल से दूर रहना चाहिए।
बढ़ता तनाव और अमेरिकी सैन्य हमले
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव काफी ज्यादा बढ़ा हुआ है। IAEA के गवर्नर्स की बोर्ड बैठक अगले हफ्ते वियना में होने वाली है, जिसमें ईरान के खिलाफ संभावित निंदा प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, इस रिपोर्ट का आना और अमेरिका द्वारा ईरान के ठिकानों पर नए सैन्य हमले होना एक ही समय पर हुआ है। 1 सितंबर 2026 तक की स्थिति के अनुसार, लगभग एक महीने के अंतराल के बाद यह पहली ऐसी झड़प थी जिसने हालात को और ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया है।