ODI क्रिकेट को बचाने की कोशिश, ICC में इंटरकॉन्टिनेंटल चैंपियनशिप का प्रस्ताव

वनडे इंटरनेशनल (ODI) क्रिकेट की घटती लोकप्रियता को देखते हुए इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) के गलियारों में एक बड़ी हलचल मची है। दुबई में आयोजित एक वर्कशॉप के दौरान क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के सीईओ टोड ग्रीनबर्ग ने 'इंटरकॉन्टिनेंटल चैंपियनशिप' का एक दिलचस्प प्रस्ताव पेश किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य 50 ओवर के खेल को एक नया मकसद और रोमांच देना है, ताकि फैंस की दिलचस्पी इस फॉर्मेट में बनी रहे।
ग्रीनबर्ग का यह सुझाव ओलंपिक की तर्ज पर है। इस मॉडल के तहत एशिया, ओशिनिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका जैसे अलग-अलग क्षेत्रों की टॉप रैंक वाली टीमें आपस में मुकाबला करेंगी। इस तरह के क्वालिफिकेशन सिस्टम से न केवल खेल को एक नया ढांचा मिलेगा, बल्कि टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी। इसके साथ ही, यह प्रस्ताव दिया गया कि गैर-विश्व कप वर्षों के दौरान वनडे मैचों की संख्या कम की जा सकती है और टी20 व वनडे के बीच एक चक्राकार (cyclical) सिस्टम लागू किया जा सकता है।
बड़े बोर्ड्स के विरोध में फंसी योजना
भले ही यह विचार सुनने में आकर्षक लगे, लेकिन हकीकत यह है कि इस योजना के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंटरकॉन्टिनेंटल चैंपियनशिप समेत कई नए बहुपक्षीय टूर्नामेंटों की योजना को फिलहाल 2031 तक के लिए टाल दिया गया है। इस देरी की सबसे बड़ी वजह क्रिकेट की दुनिया के पावरहाउस बोर्ड्स का विरोध है।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI), इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) ने इस बदलाव के प्रति अपनी नाखुशी जाहिर की है। इन बोर्ड्स का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का कैलेंडर पहले से ही बेहद व्यस्त है और उनके पास पहले से ही कई द्विपक्षीय सीरीज (bilateral commitments) तय हैं। ऐसे में मौजूदा टूर्नामेंट चक्र में बदलाव करना उनके लिए व्यावहारिक नहीं होगा।