Strait of Hormuz संकट: तेल कीमतों को रोकने के लिए IEA देशों ने बढ़ाई रफ्तार

Gautam Sahu7 October 20262 min read0 viewsWorld
Strait of Hormuz संकट: तेल कीमतों को रोकने के लिए IEA देशों ने बढ़ाई रफ्तार

दुनियाभर में ईंधन की बढ़ती कीमतों और बाजार में मची हलचल के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के सदस्य देशों ने एक बड़ा फैसला लिया है। 7 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में सदस्य सरकारों ने तेल के स्टॉक को तेजी से जारी करने की योजना को मंजूरी दी है। यह कदम मुख्य रूप से Strait of Hormuz में जारी अस्थिरता के कारण बढ़ रहे तेल के दामों को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है। विशेष रूप से डीजल की कमी को दूर करने के लिए डीजल स्टॉक को प्राथमिकता दी गई है।

IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने बताया कि मार्च 2026 में तय किए गए 400 मिलियन बैरल के वादे में से लगभग 325 मिलियन बैरल पहले ही वितरित किए जा चुके हैं। अब लक्ष्य बचे हुए तेल को जल्द से जल्द बाजार में लाने का है। बिरोल ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बाजार की स्थिति और बिगड़ती है, तो सदस्य देश अतिरिक्त स्टॉक जारी करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस पूरी रणनीति की समीक्षा 14-15 अक्टूबर को होने वाली गवर्निंग बोर्ड की बैठक में की जाएगी।

ईरान और अमेरिका के बीच खींचतान और सुरक्षा खतरा

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इस पूरे संकट की जड़ फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल युद्ध के बाद ईरान द्वारा जलमार्ग को प्रभावी ढंग से बंद करना है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के सलाहकार मोहम्मदरेजा नकदी ने दावा किया है कि ईरान "अवैध रास्तों" को ब्लॉक करेगा और अपनी "जायज मांगों" के पूरा होने तक नियंत्रण रखेगा। दूसरी तरफ, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का तर्क है कि ईरान ने इस मार्ग पर नियंत्रण खो दिया है और तेल का प्रवाह लगभग युद्ध-पूर्व स्तर पर लौट रहा है।

हालांकि, जमीनी हकीकत को लेकर डेटा अलग-अलग है। जहां यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर का कहना है कि ट्रैफिक अभी भी युद्ध से पहले की तुलना में 75% कम है, वहीं Kpler और Shell के सीईओ का मानना है कि तेल निर्यात 80% तक रिकवर कर चुका है।

सुरक्षा हालात तब और गंभीर हो गए जब 6 अक्टूबर 2026 को ओमान के लिमाह शहर के पास "On Peace" नामक एक तेल टैंकर पर हमला हुआ। इस घटना में कई लोग घायल हुए, जिन्हें ओमान वायु सेना ने मेडिकल इवैक्युएशन के जरिए बचाया। इस अस्थिरता को देखते हुए कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूके और अमेरिका जैसे G7 देश बाजार को स्थिर करने के लिए अतिरिक्त 100 मिलियन बैरल तेल जारी करने पर समन्वय कर रहे हैं।

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