यूरोप के सामने पिछले एक दशक में अवैध प्रवास यानी इल्लीगल माइग्रेशन सबसे बड़ी और जटिल समस्या बनकर उभरा है। डॉ. शैलेश शुक्ला का कहना है कि यूरोप अभी आर्थिक मंदी, ऊर्जा संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध और बढ़ती बुजुर्ग आबादी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, लेकिन अवैध प्रवासियों का मुद्दा इन सबसे कहीं अधिक गंभीर है। यह केवल सीमाओं को पार करने का मामला नहीं रह गया है, बल्कि अब इसका सीधा असर वहां की राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक एकता और कानून व्यवस्था पर पड़ रहा है।

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मानवीयता और सुरक्षा के बीच संतुलन

यूरोप के उदारवादी लोकतांत्रिक देश हमेशा से मानवाधिकारों और शरणार्थियों की सुरक्षा के लिए जाने जाते रहे हैं। हालांकि, मौजूदा संकट ने इन विकसित देशों के सामने एक बड़ी दुविधा खड़ी कर दी है। अब सरकारों को मानवीय संवेदना और अपनी सीमाओं की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने में भारी संघर्ष करना पड़ रहा है। डॉ. शुक्ला के मुताबिक, अगर जल्द ही कोई ठोस और प्रभावी समाधान नहीं निकाला गया, तो यह स्थिति आने वाले समय में यूरोप की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था को गंभीर रूप से अस्थिर कर सकती है।

Nura Basta

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