IMEC कॉरिडोर का बढ़ेगा दायरा, मिस्र और ओमान समेत 5 देश जुड़ने के इच्छुक

भारत, मध्य पूर्व और यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) अब और भी बड़ा होने जा रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति के विशेष दूत गेरार्ड मेस्ट्राललेट ने खुलासा किया है कि मिस्र, लेबनान, ओमान, ग्रीस और साइप्रस जैसे देश इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने की गहरी इच्छा जता चुके हैं। यह कॉरिडोर न केवल व्यापार को आसान बनाएगा, बल्कि वैश्विक कनेक्टिविटी के समीकरणों को भी बदल देगा।
नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मेस्ट्राललेट ने बताया कि इन देशों ने कॉरिडोर के साथ जुड़ने में अपनी रुचि दिखाई है। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि किसी भी नए देश को शामिल करने का अंतिम फैसला उन आठ मूल सदस्य देशों की सरकारों द्वारा लिया जाएगा, जिन्होंने सितंबर 2023 में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इन आठ सदस्यों में भारत, अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ शामिल हैं।
साल के अंत तक होगी बड़ी बैठक
मेस्ट्राललेट ने जानकारी दी कि अब तक इस प्रोजेक्ट पर केवल स्टीयरिंग कमेटी स्तर पर चर्चा हुई है, लेकिन अब तक कोई मंत्रिस्तरीय बैठक नहीं हुई। उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल के अंत तक एक महत्वपूर्ण मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें कॉरिडोर के विस्तार और नए सदस्यों की सदस्यता पर विचार होगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही कुछ देश पूर्ण सदस्य न बनें, लेकिन उनके साथ समन्वय करना जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि चाहे वे पूर्ण सदस्य हों या सहयोगी सदस्य, प्रोजेक्ट की सफलता के लिए उनके साथ मिलकर काम करना होगा। इसके अलावा, उन्होंने यह भी जिक्र किया कि जॉर्डन और इजरायल का नाम शुरुआती समझौते में था, लेकिन उन्होंने अभी तक हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
बता दें कि IMEC का मुख्य उद्देश्य शिपिंग, रेल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए भारत को अरब प्रायद्वीप के रास्ते यूरोप से जोड़ना है। यह प्रोजेक्ट न केवल माल ढुलाई के समय को कम करेगा, बल्कि क्लीन एनर्जी और डिजिटल कनेक्टिविटी को भी बढ़ावा देगा। मेस्ट्राललेट अपनी भारत यात्रा के दौरान ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर और बंदरगाहों के विकास पर भी चर्चा कर रहे हैं।