क्षेत्रीय संघर्ष के कारण 2026 में GCC अर्थव्यवस्था 4.8 फीसदी तक गिर सकती है IMF ने जताया अनुमान
IMF ने चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय संघर्ष के कारण 2026 में GCC अर्थव्यवस्था 4.8% तक सिकुड़ सकती है। ओमान को छोड़कर अन्य देशों में गिरावट आएगी।

मस्कट: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय संघर्षों की वजह से साल 2026 में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) की अर्थव्यवस्था में 4.8 फीसदी की गिरावट आ सकती है। अप्रैल में किए गए अनुमान के मुताबिक पहले 2 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद थी, लेकिन अब इसे घटाकर नकारात्मक कर दिया गया है।
अक्टूबर 2026 में जारी मिडिल ईस्ट और सेंट्रल एशिया के क्षेत्रीय आर्थिक आउटलुक के मुताबिक, क्षेत्रीय तनाव ने ऊर्जा उत्पादन और हाइड्रोकार्बन निर्यात को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसका असर पर्यटन और वैश्विक व्यापार पर भी पड़ा है। मस्कट डेली की रिपोर्ट के अनुसार, इस आर्थिक मंदी का असर सभी सदस्य देशों पर एक जैसा नहीं होगा।
GCC देशों में केवल ओमान ही ऐसा देश है जहां सकारात्मक वृद्धि की उम्मीद है। ओमान की जीडीपी में 4.1 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग बाधाओं का इस पर सीमित असर पड़ा है।
वहीं अन्य देशों की स्थिति चिंताजनक है। अनुमान है कि कुवैत की अर्थव्यवस्था 16.7 फीसदी, कतर की 15.6 फीसदी और बहरीन की 11.3 फीसदी तक सिकुड़ सकती है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में 3.9 फीसदी और सऊदी अरब में 3.3 फीसदी की गिरावट आने की संभावना है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस साल GCC की गैर-तेल अर्थव्यवस्था भी 0.8 फीसदी तक घट सकती है। परिवहन और कमोडिटी की लागत बढ़ने से महंगाई भी बढ़ेगी। साल 2025 में महंगाई दर 0.9 फीसदी थी, जिसके 2026 में बढ़कर 2.7 फीसदी होने का अनुमान है।
IMF की मिडिल ईस्ट और सेंट्रल एशिया विभाग के डायरेक्टर जिहाद अज़ूर और मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने इन संघर्षों से क्षेत्रीय आर्थिक परिदृश्य को होने वाले खतरों पर जोर दिया है।
IMF ने उम्मीद जताई है कि 2027 में GCC अर्थव्यवस्था में 9.1 फीसदी की वापसी हो सकती है। हालांकि, यह सुधार पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि अगले साल के अंत तक शिपिंग रूट सामान्य होते हैं या नहीं और भू-राजनीतिक तनाव कम होता है या नहीं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर तनाव और बढ़ा, तो आर्थिक ठहराव लंबा खिंच सकता है और निवेशकों का भरोसा कम हो सकता है।