गंगा जल संधि: बांग्लादेश की नई मांग पर भारत ने JRC ढांचे के तहत बातचीत पर दिया जोर

Aanya9 October 20262 min read0 viewsIndia
गंगा जल संधि: बांग्लादेश की नई मांग पर भारत ने JRC ढांचे के तहत बातचीत पर दिया जोर

भारत और बांग्लादेश के बीच नदियों और पानी के बंटवारे को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। बांग्लादेश द्वारा गंगा जल संधि को संशोधित करने या एक नया समझौता करने की मांग के बीच, भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि नदी और जल संबंधी सभी मुद्दों पर बातचीत 'जॉइंट रिवर्स कमीशन' (JRC) के दायरे में ही की जाएगी।

दरअसल, यह पूरा मामला तब गरमाया जब बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिद उद्दीन चौधरी अन्नी ने कहा कि वे दिसंबर 2026 में मौजूदा समझौते की समय सीमा समाप्त होने से पहले एक नया या संशोधित समझौता चाहते हैं। बांग्लादेश की मुख्य मांग यह है कि नए समझौते में पानी के हिस्से की स्पष्ट गारंटी दी जाए, जैसा कि 1977 के समझौते में था। गौरतलब है कि 1996 में हुए 30 साल के समझौते में ऐसी किसी गारंटी क्लॉज को शामिल नहीं किया गया था।

व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश

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गंगा जल संधि के साथ-साथ दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को भी गति दी जा रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नई दिल्ली में भारत-बांग्लादेश व्यापार संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group on Trade) की दो दिवसीय बैठक संपन्न हुई है।

  • यह बैठक लगभग तीन साल के लंबे अंतराल के बाद दोबारा शुरू हुई है।
  • बैठक संयुक्त सचिव स्तर पर आयोजित की गई थी।
  • इसमें द्विपक्षीय एजेंडे के तहत विभिन्न व्यापारिक मुद्दों पर गहन चर्चा की गई।

भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 साझा नदियां हैं, लेकिन गंगा ही एकमात्र ऐसी नदी है जिसके लिए 30 साल की जल-साझाकरण संधि की गई है। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 2026 की समय सीमा से पहले दोनों देश इस विवाद को सुलझाने और एक नए समझौते पर पहुंचने में कितनी कामयाबी पाते हैं।

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