भारत और भूटान के रिश्ते हुए मजबूत, विदेश मंत्री एस जयशंकर के दौरे पर हुए कई बड़े ऐलान.

भारत और भूटान के बीच आपसी रिश्तों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में विदेश मंत्री S Jaishankar का हालिया दौरा बेहद सफल रहा है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच विकास सहयोग, ऊर्जा, फिनटेक, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसे कई अहम क्षेत्रों में बातचीत हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में इस पूरी यात्रा के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की और इसे दोनों देशों के पुराने और गहरे रिश्तों के लिए एक नया कदम बताया।
दौरे के दौरान हुई उच्च स्तर की मुलाकातें
अपनी इस आधिकारिक यात्रा के दौरान भारतीय विदेश मंत्री ने September 16 to 18 के बीच भूटान का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भूटान के राजा Jigme Khesar Namgyel Wangchuck से मुलाकात की और प्रधानमंत्री Tshering Tobgay के साथ भी बैठक की। इसके अलावा, उन्होंने अपने भूटानी समकक्ष D N Dhungyel के साथ द्विपक्षीय संबंधों के तमाम पहलुओं पर लंबी चर्चा की और भारत की तरफ से भूटान के विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पूरा समर्थन देने की बात दोहराई।
इन पांच बड़ी परियोजनाओं का हुआ उद्घाटन
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि इस दौरे के दौरान दोनों देशों के मंत्रियों ने मिलकर कुल five projects की शुरुआत की है। इसमें मोंगार में एक 65-bedded child hospital का उद्घाटन शामिल है। इसके अलावा भारत की तरफ से भूटानी कृषि और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बुथांग स्थित नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर को 43 Jersey cows सौंपी गईं। पूर्वी भूटान में समद्रुप जोंगखार-त्राशीगांग हाईवे पर बने जगन्नाथ ब्रिज का भी उद्घाटन किया गया। साथ ही भूटान सरकार को 54 electric vehicles दिए गए और 500 kW Lunana hydropower project की नींव भी रखी गई।
डिजिटल और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग
भारत और भूटान के बीच ऊर्जा साझेदारी पर भी विस्तार से बात हुई जो पिछले कई दशकों से लगातार आगे बढ़ रही है। इसके साथ ही डिजिटल सहयोग को लेकर भी बड़ी प्रगति हुई है। भारत का डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म UPI पहले से ही भूटान में काम कर रहा है और अब इस सुविधा को और अधिक बेहतर बना दिया गया है जिससे वहां के पर्यटकों और छात्रों को काफी ज्यादा आसानी होगी। इसके अलावा शिक्षा के क्षेत्र में भी भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद यानी ICCR और नालंदा विश्वविद्यालय द्वारा दी जाने वाली छात्रवृत्तियों के दायरे को बढ़ाया गया है ताकि अधिक से अधिक भूटानी छात्र लाभ उठा सकें।