भारत और भूटान के बीच डिजिटल पेमेंट का नया दौर, यूपीआई का दूसरा चरण लॉन्च.

भारत और भूटान के रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। थिम्पू में विदेश मंत्री एस जयशंकर और भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग तोबगे ने मिलकर अंतरराष्ट्रीय यूपीआई के दूसरे चरण की शुरुआत की। इस नई शुरुआत के साथ ही दोनों देशों के बीच डिजिटल पेमेंट की प्रक्रिया पूरी तरह से दोतरफा हो गई है। अब भारत आने वाले भूटानी नागरिक भी आसानी से यूपीआई के जरिए डिजिटल भुगतान कर सकेंगे।
डिजिटल और आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस पहल के पूरा होने से दोनों पड़ोसी देशों के आम लोगों के बीच वित्तीय लेनदेन बेहद आसान हो गया है। इससे पहले भारत के लोग भूटान में यूपीआई का उपयोग कर पा रहे थे, लेकिन अब भूटान के नागरिक भी जब भारत की यात्रा पर आएंगे, तो वे बिना किसी परेशानी के अपने डिजिटल वॉलेट और यूपीआई का इस्तेमाल करके भुगतान कर सकेंगे। यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाता है।
छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और इलेक्ट्रिक वाहन
अपनी इस आधिकारिक यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने कई अन्य महत्वपूर्ण समझौतों पर भी चर्चा की। विदेश मंत्री एस जयशंकर और प्रधानमंत्री त्शेरिंग तोबगे की मौजूदगी में नेहरू वांगचुक छात्रवृत्ति योजना के विस्तार से जुड़े समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया। इस योजना के तहत भूटानी छात्र भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों में आकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगे, जिससे दोनों देशों के बीच शैक्षणिक और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग और अधिक मजबूत होगा। इसके अलावा, भारत ने पर्यावरण को सुरक्षित रखने और बढ़ावा देने के लिए भूटान को 54 मेड इन इंडिया इलेक्ट्रिक वाहन भी सौंपे, जो यह साबित करता है कि भारत भूटान में ई-मोबिलिटी और टिकाऊ परिवहन के विकास में पूरी तरह मदद कर रहा है।
सांस्कृतिक जुड़ाव और डेयरी क्षेत्र में सहयोग
अपनी यात्रा के पिछले दिनों में विदेश मंत्री ने भूटान के सांस्कृतिक और सामुदायिक स्तर के रिश्तों को भी गहराई से महसूस किया। उन्होंने भूटान के डेयरी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए वहां के अधिकारियों को 43 शुद्ध जर्सी गायें सौंपी। इसके साथ ही उन्होंने बाumthang क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक वांगचूचोलिंग पैलेस का दौरा किया और पवित्र कुर्जे लाखांग मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना भी की। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भूटान के विदेश मंत्री डी एन ढुंगयेल के निमंत्रण पर 16 से 17 सितंबर तक इस आधिकारिक यात्रा पर भूटान का दौरा किया था। इस पूरी यात्रा के दौरान भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि वह भूटान की प्रगति और समृद्धि के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। आप इस पूरी आधिकारिक अपडेट को विदेश मंत्री के आधिकारिक X अकाउंट पर देख सकते हैं।