भारत और चीन होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से निपटने के लिए तैयार

सिंगापुर के पूर्व विदेश मंत्री जॉर्ज यो ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उनके अनुसार, भारत और चीन जैसे देश विविध स्रोतों और रणनीतिक भंडारों के कारण Strait of Hormuz disruptions जैसी ऊर्जा आपूर्ति की समस्याओं का सामना करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं। कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव के दौरान उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों पर खुलकर अपने विचार रखे।
जॉर्ज यो ने स्पष्ट किया कि यद्यपि पश्चिम एशिया में तनाव और जलडमरूमध्य में बाधाओं की आशंका बनी रहती है, लेकिन भारत और चीन ने अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई है। चीन इस मामले में पूरी तरह आश्वस्त नजर आता है, जबकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिकी टैरिफ दबाव के बावजूद रूस से तेल खरीदना जारी रख सकता है।
अमेरिका और चीन के साथ रणनीतिक संतुलन
अमेरिका के साथ संबंधों पर बात करते हुए यो ने सलाह दी कि भारत को अपनी बातचीत की स्थिति को मजबूत रखना होगा ताकि वह दबाव में न आए। इसके अलावा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में भारत को किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर रहने से बचना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को चीनी ओपन-सोर्स तकनीक का लाभ उठाकर अपनी खुद की क्षमताएं विकसित करनी चाहिए, बशर्ते डेटा सुरक्षा और एप्लीकेशन लेयर पर पूरा नियंत्रण रखा जाए।
भारत-चीन आर्थिक संबंध और भविष्य
भारत और चीन के बीच आर्थिक सहयोग पर बोलते हुए उन्होंने एक व्यावहारिक और यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उनका मानना है कि राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए चीनी इनपुट का उपयोग भारत को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकता है। कुल मिलाकर, यह कूटनीतिक और आर्थिक संतुलन आने वाले समय में एशियाई क्षेत्र की स्थिरता और विकास के लिए बेहद अहम साबित होगा।