साइप्रस में भारत के नौसेना सहयोग पर रक्षा सचिव राजेश सिंह की चर्चा

निकोसिया (साइप्रस): भारत और साइप्रस के बीच नौसेना सहयोग बढ़ाने को लेकर मंगलवार को बातचीत हुई। भारतीय रक्षा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने किया, जिन्होंने साइप्रस नौसैनिक कमान के कमांडर कमोडोर निकोलाओस लूका से मुलाकात की।
यह बैठक मारी नौसैनिक अड्डे पर हुई, जहां सिंह पहुंचे थे। बातचीत में नौसेना नेतृत्व के बीच आदान-प्रदान, समुद्री सुरक्षा और डोमेन अवेयरनेस, खोज और बचाव समन्वय, संयुक्त प्रशिक्षण, पेशेवर आदान-प्रदान और भारतीय नौसेना के जहाजों के बंदरगाह पर रुकने जैसे विषयों पर ध्यान दिया गया। भारतीय उच्चायोग के मुताबिक यह चर्चा दोनों देशों के रक्षा सहयोग के रोडमैप (2026-2031) के तहत हुई।
उच्चायोग ने एक्स पर लिखा कि बैठक में दोनों नौसेनाओं के बीच लगातार संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया गया। इस दौरान उच्चायुक्त मनीष भी प्रतिनिधिमंडल के साथ मौजूद थे।
इसके बाद सिंह, उच्चायुक्त मनीष और प्रतिनिधिमंडल मारी नौसैनिक अड्डे पर साइप्रस नौसेना के गश्ती पोत पी61, यानी कमोडोर आंद्रियास लोआनिडिस, पर गए। उन्होंने वहां अधिकारियों और चालक दल से मुलाकात की और साइप्रस नौसैनिक कमान से ब्रीफिंग ली। उच्चायोग ने बताया कि यह दौरा दिन की समुद्री सुरक्षा और नौसेना सहयोग की चर्चा को व्यावहारिक नजरिया देता है।
सिंह ने माकेडोनिटिसा सैन्य कब्रिस्तान में पुष्पचक्र अर्पित किया और विजिटर्स बुक पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने 1974 में साइप्रस की रक्षा में जान गंवाने वाले यूनानी और साइप्रस के सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उच्चायोग के मुताबिक भारत ने साइप्रस की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का लगातार समर्थन किया है। उसने यह भी कहा कि भारतीय सैनिकों का द्वीप की सुरक्षा से लंबा जुड़ाव रहा है, जिसमें जनरल के.एस. थिमैया का नाम शामिल है, जिन्होंने UNFICYP का नेतृत्व किया था और 1965 में साइप्रस में उनका निधन हुआ।
रक्षा सचिव सिंह 12 से 13 अक्टूबर तक साइप्रस के आधिकारिक दौरे पर हैं। इस दौरान वे साइप्रस के रक्षा मंत्रालय में अपने समकक्षों से मिल रहे हैं और साइप्रस के नेतृत्व से भी मुलाकात कर रहे हैं। साइप्रस के राष्ट्रपति के मई 2026 में भारत दौरे के बाद भारत-साइप्रस रणनीतिक साझेदारी को और गति मिलने की बात मंत्रालय ने कही है। मंत्रालय के मुताबिक इस दौरे से खासकर समुद्री क्षेत्र में द्विपक्षीय जुड़ाव को गहरा और व्यापक करने की साझा प्रतिबद्धता सामने आने की उम्मीद है।