भारत की चुनाव प्रणाली आधुनिक दुनिया की बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि: गल्फ टुडे

भारत की चुनाव प्रणाली को आधुनिक दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक उपलब्धियों में से एक माना गया है। 'गल्फ टुडे' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अपनी विशाल जनसंख्या और भाषाई, भौगोलिक, सांस्कृतिक व आर्थिक विविधताओं के बावजूद भारत जिस तरह नियमित और प्रतिस्पर्धी चुनाव कराता है, वह काबिले तारीफ है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत का यह अनुभव उन अन्य लोकतांत्रिक देशों के लिए एक बेहतरीन सबक हो सकता है जो मतदाता भागीदारी और चुनावी प्रशासन में सुधार करना चाहते हैं।
भारत ने एक ऐसा व्यापक चुनावी बुनियादी ढांचा तैयार किया है, जो हिमालय के दूरदराज के गांवों और द्वीपों से लेकर रेगिस्तानों और घने शहरों तक पहुंचता है। हालांकि, इस बड़ी सफलता के बीच कुछ विवाद भी सामने आते रहते हैं। चर्चा है कि चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के जरिए करीब 13 करोड़ भारतीयों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। लेकिन रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि पुराने या गलत रिकॉर्ड्स को हटाने और पात्र नागरिकों के वोटिंग अधिकार छीनने के बीच एक बड़ा अंतर है।
चुनावी चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का संगम
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसकी विशाल मतदाता संख्या और आंतरिक प्रवासन (Internal Migration) है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यक्ति बिहार से दिल्ली शिफ्ट होता है, तो उसे पुराने निर्वाचन क्षेत्र से हटाकर नए पते पर पंजीकृत करना होता है। यह प्रक्रिया मताधिकार छीनना नहीं, बल्कि रिकॉर्ड को अपडेट करना है। रिपोर्ट के मुताबिक, संविधान का अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 इस पूरी प्रक्रिया को कानूनी आधार प्रदान करते हैं।
भारत केवल अपने देश में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चुनावी प्रशासन में मदद कर रहा है। 2011 में स्थापित 'इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट' के माध्यम से भारत ने अब तक 141 देशों के लगभग 3,000 चुनाव अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है। भारत ने भूटान, नेपाल और नामीबिया जैसे देशों को अपनी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVM) प्रदान की हैं और कई देशों को अमिट स्याही की आपूर्ति भी की है। वर्तमान में भारत का 28 देशों और तीन अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ चुनावी सहयोग समझौता है।