भारत, फ्रांस और UAE की बड़ी बैठक, न्यूयॉर्क में आपसी साझेदारी और तकनीक पर हुई चर्चा.

भारत, फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के बड़े मंत्रियों ने मिलकर न्यूयॉर्क में एक अहम बैठक की है। यह बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UNGA के 81वें सत्र के दौरान 22 सितंबर 2026 को हुई, जिसमें तीनों देशों के बीच चल रही दोस्ती और सहयोग को आगे बढ़ाने पर बातचीत की गई। इस उच्च स्तर की मीटिंग में तीनों देशों ने मिलकर अब तक के कामों की समीक्षा की और आने वाले समय के लिए नए प्लान तैयार किए ताकि आपसी रिश्ते और ज्यादा मजबूत हो सकें।
किन बड़े मुद्दों पर हुई खास चर्चा
इस त्रिपक्षीय बैठक की अगुवाई भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar, फ्रांस के यूरोप और विदेश मामलों के मंत्री Jean-Noel Barrot और UAE के उप प्रधानमंत्री तथा विदेश मंत्री Sheikh Abdullah bin Zayed Al Nahyan ने की। मंत्रियों ने मुख्य रूप से अंतरिक्ष अनुसंधान यानी स्पेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, संस्कृति और विरासत जैसे अहम सेक्टरों में मिलकर काम करने पर जोर दिया। इसके अलावा बैठक में पश्चिम एशिया के हालात, स्वास्थ्य विज्ञान और ऊर्जा यानी एनर्जी के क्षेत्र में विकास को लेकर भी विस्तार से बातचीत की गई।
स्पेस और तकनीक में बढ़ेगा सहयोग
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि तीनों देशों ने आपसी हितों और एक-दूसरे की क्षमताओं से मिलने वाले फायदों का आकलन किया है। सभी पक्षों ने यह सहमति जताई है कि वे इन रणनीतिक चर्चाओं को आगे बढ़ाने के लिए जल्द ही फिर से मिलेंगे। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत और फ्रांस की साझेदारी पहले से ही बहुत मजबूत है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO और फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी CNES मिलकर कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इस साझेदारी में मानव अंतरिक्ष उड़ान, आधुनिक तकनीक का विकास, पृथ्वी की निगरानी और दोनों देशों की स्पेस कंपनियों के बीच आपसी तालमेल शामिल है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भारत का जोर
इस दौरान भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के लिए अपनी मुख्य प्राथमिकताओं को सबके सामने रखा। भारत ने स्थानीय स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के विकास को बढ़ावा देने और एआई गवर्नेंस के लिए एक समावेशी वैश्विक ढांचा तैयार करने पर जोर दिया। मंत्रियों ने ठोस पहलों के जरिए आपसी रिश्तों को बेहतर बनाने और भविष्य में नियमित बैठकें करने के लिए एक रूपरेखा तैयार की है, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और वहां के कारोबार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।