भारत और IOM ने वैश्विक प्रवास और नैतिक भर्ती के साथ जलवायु परिवर्तन से होने वाले विस्थापन पर की चर्चा

नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन और इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) की महानिदेशक एमी पोप ने वैश्विक प्रवास के रुझानों और भारत के लिए अवसरों को बढ़ाने पर बातचीत की। 16 अक्टूबर 2026 को हुई इस बैठक में दोनों पक्षों ने प्रवासन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
इससे पहले 15 अक्टूबर को एमी पोप ने केंद्रीय श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे से मुलाकात की थी। इस दौरान कौशल मान्यता, नियमित श्रम मार्गों और नैतिक भर्ती के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
अपनी यात्रा के दौरान एमी पोप ने चेन्नई में उन श्रमिकों से भी मुलाकात की जो IOM द्वारा संचालित मोबाइल वर्कर रिसोर्स सेंटर्स से मदद ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा के लिए समय पर सही जानकारी मिलना बहुत जरूरी है।
पोप ने चेतावनी दी कि दुनिया भर में श्रम की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कानूनी और सुरक्षित प्रवास मार्ग होने चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो तस्करों और मानव Traffickers द्वारा श्रमिकों के शोषण का खतरा बढ़ जाएगा।
उन्होंने दक्षिण एशिया में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर चिंता जताते हुए बताया कि 2050 तक इसके कारण करीब 4 करोड़ 5 लाख लोग विस्थापित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में जलवायु परिवर्तन की वजह से आजीविका छिन रही है जिससे शहरीकरण की रफ्तार तेज हुई है। साथ ही उन्होंने भारत सरकार द्वारा अर्ली वार्निंग सिस्टम में किए गए निवेश की तारीफ भी की।
यह चर्चा मई 2026 में न्यूयॉर्क में हुई मुलाकात का हिस्सा है जब विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने इंटरनेशनल माइग्रेशन रिव्यू फोरम के दौरान एमी पोप से बात की थी। उस समय प्रवास मार्गों के विविधीकरण और सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन के लिए ग्लोबल कॉम्पैक्ट को लागू करने की प्रतिबद्धता पर चर्चा हुई थी।