बात हुआ साफ़, भारत ईरान के साथ, विदेश मंत्री ने UNGA में किया मुलाकात.

न्यूयॉर्क: UNGA (संयुक्त राष्ट्र महासभा) के 81वें सत्र की हलचल के बीच भारत की कूटनीतिक सक्रियता खुलकर सामने आई है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री डॉ. अब्बास अराघची के साथ एक अहम मुलाकात की, जिसमें खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष पर विस्तार से चर्चा हुई।
जयशंकर का बयान
मुलाकात के बाद जयशंकर ने X पर लिखा —
"ईरान के विदेश मंत्री अराघची के साथ UN में #UNGA81 के दौरान हुई बातचीत सराहनीय रही। हमने खाड़ी संघर्ष से जुड़े ताज़ा घटनाक्रम पर चर्चा की। संपर्क में बने रहेंगे।"
भारत के लिए क्यों अहम है यह मुलाकात?
यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक शिष्टाचार भर नहीं है। भारत खाड़ी क्षेत्र से भारी मात्रा में ऊर्जा (तेल-गैस) आयात करता है, और वहां चल रहा संघर्ष सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री यातायात और वैश्विक व्यापार को प्रभावित करता है। यही वजह है कि भारत लगातार संवाद, तनाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की वकालत करता रहा है।

राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, ईरान इस समय प्रतिबंधों और बदलते गठबंधनों के बीच अपनी कूटनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे में भारत जैसे बड़े क्षेत्रीय साझेदार के साथ यह बातचीत ईरान के लिए भी अहम मानी जा रही है।
सिर्फ ईरान ही नहीं — जयशंकर की व्यस्त डिप्लोमैटिक डायरी
UNGA81 के दौरान जयशंकर की मुलाकातों की सूची लंबी रही:
- रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ — द्विपक्षीय रिश्तों और BRICS सहयोग पर चर्चा
- ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी के साथ मुलाकात — खाड़ी के हालिया घटनाक्रम पर अपडेट लिया
- भारत-GCC (गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल) ट्रोइका मंत्रिस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता — जिसमें भारत-GCC संयुक्त कार्ययोजना 2024-28 की प्रगति की समीक्षा हुई
- इसके अलावा आर्मीनिया, इराक, मालदीव, एस्टोनिया और घाना समेत कई देशों के समकक्षों से भी मुलाकातें कीं
भारत की खाड़ी नीति — सिर्फ बयान नहीं, ठोस जुड़ाव
गौर करने वाली बात यह है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब जयशंकर ने खाड़ी संकट पर विदेशी नेताओं से बात की हो — पिछले कुछ महीनों से यह मुद्दा उनकी लगभग हर बड़ी द्विपक्षीय मुलाकात में शामिल रहा है। लाखों भारतीय प्रवासी जो खाड़ी क्षेत्र में रहते और काम करते हैं, उनकी सुरक्षा और वहां का स्थायित्व भारत की विदेश नीति की प्राथमिकताओं में हमेशा ऊपर रहा है।