भारत और कज़ाकिस्तान को एआई और कनेक्टिविटी पर मिलकर काम करना चाहिए
India urges Kazakhstan to move from AI discussions to joint projects, strengthening bilateral connectivity, digital infrastructure, and trade.

भारत और कज़ाकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी को अब केवल बैठकों और चर्चाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे ज़मीनी स्तर पर ठोस परियोजनाओं में बदलना होगा। अस्ताना में महात्मा गांधी जयंती और अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के अवसर पर बोलते हुए, कज़ाकिस्तान में भारत के राजदूत वाई.के. सैलास थंगल ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि दोनों देशों के बीच संबंधों के अगले चरण की परिभाषा "सच्चे अर्थों में कनेक्टिविटी" होनी चाहिए।
राजदूत थंगल की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कज़ाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में एआई एंड डिजिटल ब्रिज 2026 का आयोजन किया गया है। इस प्रतिष्ठित तकनीकी मंच पर दुनिया भर के उद्यमी, निवेशक, शोधकर्ता और सरकारें कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर चर्चा करने के लिए एकजुट हुए हैं। भारत ने भी इस वर्ष की शुरुआत में अपने एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, और अब दोनों देश अपनी इस तकनीकी क्षमता को एक कदम आगे ले जाने के मूड में हैं।
एआई और डिजिटल तकनीक में साझा ताकत
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा करते हुए राजदूत थंगल ने बताया कि दोनों देशों के पास एक-दूसरे की पूरक ताकतें हैं। भारत के पास जहां एआई प्रतिभाओं का विशाल भंडार, एक मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर है, वहीं कज़ाकिस्तान ने क्षेत्रीय तकनीकी केंद्र के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कागजी चर्चाओं और बैठकों से आगे बढ़कर वास्तविक और व्यावहारिक संयुक्त सहयोग की ओर कदम बढ़ाया जाए। स्वास्थ्य सेवा, कृषि और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने की अपार संभावनाएं हैं। राजदूत ने संयुक्त अनुसंधान और नवाचार केंद्र स्थापित करने का भी सुझाव दिया, जिससे आम लोगों के जीवन में सुधार आ सके और आर्थिक विकास को गति मिल सके.
डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और यूपीआई की तर्ज पर सहयोग
भारत के डिजिटल भुगतान और डिजिटल पहचान के अनुभवों को लेकर कज़ाकिस्तान के बाजारों में काफी रुचि है। भारत में जहां यूपीआई (UPI) ने क्रांति ला दी है, वहीं कज़ाकिस्तान में 'कास्पी' (Kaspi) भुगतान प्रणाली काफी लोकप्रिय है। वहां सब्जी बेचने वाले छोटे विक्रेताओं से लेकर हर आम नागरिक तक इस यूनिवर्सल पेमेंट सिस्टम का उपयोग कर रहा है। राजदूत थंगल के अनुसार, भारत और कज़ाकिस्तान अपने इन अनुभवों को मिलाकर अधिक मजबूत और सुरक्षित डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर सकते हैं, जिससे न केवल दोनों देशों बल्कि पूरे यूरेशियन क्षेत्र को फायदा होगा।
यूरेशियाई क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी
चीन, रूस, यूरोप और मध्य एशिया के बीच स्थित कज़ाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद खास बनाती है। भारत कज़ाकिस्तान को केवल एक ट्रांजिट रूट या पारगमन गंतव्य के रूप में नहीं देखता, बल्कि यूरेशियाई क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय साझेदार मानता है। दोनों देश प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ स्वतंत्र और परिपक्व संबंध रखते हैं, जो उनके द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत करने के लिए एक अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।
महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के संदेश को याद करते हुए, जो आज के भू-राजनीतिक तनावों के दौर में और अधिक प्रासंगिक हो गया है, भारत और कज़ाकिस्तान आपसी विश्वास और तकनीकी सहयोग के दम पर एक नए भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।