भारत सरकार का बड़ा कदम, फारस की खाड़ी और संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों जाने वाले नाविकों के लिए ट्रैकिंग सिस्टम लॉन्च.

Nura Basta5 September 20263 min read30 viewsIndia
भारत सरकार का बड़ा कदम, फारस की खाड़ी और संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों जाने वाले नाविकों के लिए ट्रैकिंग सिस्टम लॉन्च.

भारतीय नाविकों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए देश के समुद्री प्रशासन ने एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) ने खतरनाक समुद्री इलाकों में काम करने वाले भारतीय नाविकों की लाइव लोकेशन और सुरक्षा स्थिति पर नजर रखने के लिए एक नया ट्रैकिंग सिस्टम शुरू किया है। इस नई व्यवस्था से खाड़ी देशों और अन्य संवेदनशील समुद्री रास्तों पर सफर करने वाले हमारे नाविकों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि आपातकाल के समय अब तुरंत मदद पहुंचाई जा सकेगी।

ई-नाविक पोर्टल पर शुरू हुआ नया मॉड्यूल

यह नया ट्रैकिंग सिस्टम e-NAVIK पोर्टल पर सीफेरर ट्रैकिंग मॉड्यूल के नाम से शुरू किया गया है। इसे 4 सितंबर 2026 को जारी किए गए सर्कुलर नंबर 56 of 2026 के तहत लाया गया है। इस योजना को जमीन पर उतारने की आधिकारिक शुरुआत 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली और मुंबई से की गई। इस नई तकनीकी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य उन सभी भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है जो दुनिया के संवेदनशील और जोखिम भरे समुद्री इलाकों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

किन-किन इलाकों में लागू रहेगा यह नियम

भारत सरकार का यह नया नियम उन सभी जहाजों और नाविकों पर लागू होगा जो बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण माने जाने वाले समुद्री क्षेत्रों से गुजरते हैं। इन क्षेत्रों में मुख्य रूप से परशियन गल्फ (Persian Gulf), स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज (Strait of Hormuz), गल्फ ऑफ ओमान (Gulf of Oman), रेड सी (Red Sea), गल्फ ऑफ अदन (Gulf of Aden) और ब्लैक सी (Black Sea) शामिल हैं। इन इलाकों में अक्सर सुरक्षा को लेकर जोखिम बने रहते हैं, इसलिए सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है ताकि किसी भी अनहोनी से तुरंत निपटा जा सके।

शिपिंग कंपनियों और मालिकों के लिए जरूरी निर्देश

इस नई व्यवस्था के तहत रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंस (RPSL) धारकों, भारतीय जहाज मालिकों और ऑपरेटर्स के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे जहाजों की पूरी जानकारी दर्ज करें। इसमें जहाज की पहचान, यात्रा का पूरा ब्योरा और नाविकों की जानकारी शामिल है। इसके अलावा नाविकों के जहाज पर चढ़ने और उतरने की स्थिति के साथ-साथ रोज की लोकेशन की जानकारी भी देनी होगी। यह सारा डेटा मिसाइल हमलों, समुद्री डकैती या किसी भी तरह की इमरजेंसी के समय अधिकारियों को तुरंत राहत पहुंचाने में मदद करेगा।

गोपनीयता और आपातकालीन संपर्क

फिलहाल यह मॉड्यूल अपने बीटा वर्जन में काम कर रहा है लेकिन इसके नियम तुरंत और सख्ती से लागू कर दिए गए हैं। इकट्ठा किया गया सारा डेटा पूरी तरह गोपनीय और सुरक्षित रखा जाएगा, जिस तक केवल अधिकृत लोग ही पहुंच सकेंगे। सरकार ने साफ किया है कि जहाज मालिकों और एजेंसियों को नाविकों के परिवारों के लिए 24 घंटे चालू रहने वाले इमरजेंसी नंबर रखने होंगे। साथ ही यात्रा से जुड़े जोखिमों का आकलन भी पहले ही करना होगा। सुरक्षा कारणों से अधिकारियों ने यह भी सलाह दी है कि जहाज की लोकेशन और रूट की जानकारी सोशल मीडिया पर बिल्कुल साझा न की जाए ताकि किसी भी खतरे से बचा जा सके।

आपातकाल के लिए हेल्पलाइन नंबर और ईरान जाने पर रोक

किसी भी समुद्री सुरक्षा घटना या संकट के समय तुरंत तालमेल बिठाने के लिए DGComm Centre को मुख्य केंद्र बनाया गया है। इससे व्हाट्सएप नंबर +91 8657549760, लैंडलाइन नंबर +91 22 22613606 और +91 8657549752 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा ईमेल आईडी [email protected] के जरिए भी संपर्क हो सकता है। भारतीय नौसेना के IFC-IOR केंद्र से भी व्हाट्सएप नंबर +91 7428963733 और फोन नंबर +91 124-2208385 के जरिए मदद ली जा सकती है। क्रू से जुड़े सवालों के लिए [email protected] पर ईमेल किया जा सकता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगले आदेश तक ईरान में भारतीय नाविकों को भेजने पर पूरी तरह रोक जारी रहेगी।

Share:

Comments

Leave a comment