नाविकों की सुरक्षा के लिए भारत की बड़ी पहल, समुद्री हमलों को रोकने के लिए बनाया नया वैश्विक समूह

समुद्रों में बढ़ते हमलों और व्यावसायिक जहाजों पर होते खतरों के बीच भारत ने एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने जानकारी दी है कि 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेयरर्स' (GoF on S4) का गठन किया गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के समुद्री हितधारकों को एक मंच पर लाना है ताकि नाविकों की सुरक्षा और व्यावसायिक शिपिंग को वैश्विक चर्चा के केंद्र में लाया जा सके।
खासकर खाड़ी क्षेत्र और ब्लैक सी (Black Sea) में व्यावसायिक जहाजों पर हो रहे लगातार हमलों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए चिंता बढ़ा दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बताया कि इस समूह के जरिए उन देशों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा जो व्यावसायिक शिपिंग, समुद्री उद्योग और बड़े नाविक समुदायों से जुड़े हैं। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि समुद्री व्यापार प्रभावित न हो और जहाजों पर सवार चालक दल पूरी तरह सुरक्षित रहे।
25 देशों ने मिलाया हाथ, लाइबेरिया के साथ मिलकर भारत ने संभाली कमान
इस महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत न्यूयॉर्क में हुई, जहां भारत और लाइबेरिया ने सह-अध्यक्ष के रूप में नेतृत्व किया। इस पहली बैठक में कुल 25 देशों ने हिस्सा लिया, जिनमें प्रमुख शिपिंग सेवा प्रदाता और वे देश शामिल थे जिनके पास नाविकों की बड़ी संख्या है। भारत और लाइबेरिया ने एक संयुक्त बयान जारी कर हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र और ब्लैक सी में जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है।
दोनों देशों ने इन हमलों को पूरी तरह से अस्वीकार्य और अक्षम्य बताया है। संयुक्त बयान में कहा गया है कि ऐसे हमले न केवल निर्दोष लोगों की जान लेते हैं, बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार को भी बाधित करते हैं। भारत और लाइबेरिया ने उन परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है जिन्होंने अपने प्रियजनों को इन हमलों में खोया है।
गौरतलब है कि इस समूह की नींव पिछले महीने 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान रखी गई थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस पहल की जरूरत पर जोर देते हुए कहा था कि भारत नाविकों का एक प्रमुख स्रोत देश है, जबकि लाइबेरिया के पास दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग रजिस्ट्री है। इन दोनों देशों का साथ आना समुद्री सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है, ताकि भविष्य में ऐसे हमलों को रोका जा सके और नाविकों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।