मालदीव की मदद के लिए भारत ने 3000 करोड़ रुपये की करेंसी स्वैप सुविधा के पहले रोलओवर को दी मंजूरी

नई दिल्ली: भारत ने मालदीव सरकार के औपचारिक अनुरोध को स्वीकार करते हुए 3,000 करोड़ रुपये की करेंसी स्वैप व्यवस्था के पहले रोलओवर को मंजूरी दे दी है। यह व्यवस्था 23 अक्टूबर से लागू होगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया को बताया कि भारत और मालदीव के बीच विकास सहयोग की गहरी साझेदारी है। उन्होंने कहा कि मालदीव सरकार के अनुरोध पर 23 अक्टूबर 2026 से 3,000 करोड़ रुपये की करेंसी स्वैप का पहला रोलओवर किया जाएगा।
जायसवाल के मुताबिक यह कदम दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय विकास सहयोग को मजबूत करेगा और आर्थिक लचीलेपन को बढ़ावा देगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस रोलओवर से मालदीव की वित्तीय स्थिरता में मदद मिलेगी।
भारतीय उच्चायोग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह सुविधा सार्क देशों के लिए करेंसी स्वैप व्यवस्था के ढांचे के तहत दी गई है। इस समझौते पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण के बीच अक्टूबर 2024 में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की नई दिल्ली यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे।
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि 2024-27 के द्विपक्षीय ढांचे के तहत रियायती शर्तों और अनुकूल ब्याज दरों का लाभ दिया जा रहा है। साल 2012 में इस ढांचे की शुरुआत के बाद से आरबीआई ने मालदीव को कुल 1.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की स्वैप सहायता प्रदान की है।
भारत ने सॉवरेन डेट निवेश के जरिए भी मालदीव की वित्तीय स्थिरता को सहारा दिया है। इसमें 250 मिलियन और 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर के दीर्घकालिक ट्रेजरी बॉन्ड के साथ-साथ 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर के तीन ट्रेजरी बिल शामिल हैं। भारत सरकार ने ब्याज भुगतान के लिए 42.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर भी दिए हैं।
भारतीय उच्चायोग ने कहा कि मालदीव भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति और 'महासागर' (MAHASAGAR) विजन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। नई दिल्ली ने राष्ट्रपति मुइज्जू की अक्टूबर 2024 की यात्रा के दौरान अपनाए गए आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी के साझा विजन को लागू कर द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।