ढाका के मीरपुर में चौथे दिन भी गारमेंट वर्कर्स सड़क पर, पुलिस ने छोड़ी आंसू गैस
बांग्लादेश में वेतन वृद्धि को लेकर गारमेंट वर्कर्स का प्रदर्शन जारी है। भारत इस स्थिति पर नजर रखे हुए है और सकारात्मक संबंधों की उम्मीद करता है।

नई दिल्ली: बांग्लादेश में गारमेंट वर्कर्स के बीच जारी विरोध प्रदर्शन और आंतरिक अशांति पर भारत करीब से नजर रख रहा है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान यह बात कही। उन्होंने जोर दिया कि भारत अपने पड़ोसी देश के साथ सकारात्मक, रचनात्मक और भविष्य की ओर देखने वाले संबंधों के लिए काम करना चाहता है।
जायसवाल ने बांग्लादेश की स्थिति पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वहां हो रहे घटनाक्रमों पर भारत लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने की इच्छा जताई।
सीमा पार जल विवादों और गंगा जल संधि जैसे मुद्दों पर प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि इन विषयों पर चर्चा के लिए पहले से ही द्विपक्षीय तंत्र मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि भारत और बांग्लादेश के बीच एक 'जॉइंट रिवर्स कमीशन' है, जो गंगा सहित सभी साझा नदियों पर चर्चा के लिए एक संरचित माध्यम है।
उच्च स्तरीय राजनयिक मुलाकातों के बारे में जानकारी देते हुए रणधीर जायसवाल ने बताया कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को भारत आने का निमंत्रण पहले ही दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कोई नया अपडेट आने पर जानकारी दी जाएगी।
दूसरी ओर, बांग्लादेश में गारमेंट वर्कर्स का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को चौथे दिन भी जारी रहा। ढाका के मीरपुर इलाके में कुछ फैक्ट्रियों ने सुबह कामकाज फिर से शुरू किया था, लेकिन जल्द ही मजदूर सड़कों पर उतर आए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।
मजदूरों की मुख्य मांग न्यूनतम मासिक वेतन में भारी बढ़ोतरी की है। वर्तमान में न्यूनतम वेतन 12,500 बी डी टी (BDT) है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे बढ़ाकर 30,000 बी डी टी करने की मांग कर रहे हैं।
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए गाजीपुर, नारायणगंज और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के 12 प्लाटून तैनात किए गए हैं। BGB ने एक बयान में बताया कि वे स्थानीय प्रशासन और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाकर काम कर रहे हैं।
सुरक्षा बलों ने स्थिति पर नजर रखने के लिए ड्रोन और बॉडी-वर्न कैमरों जैसी तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है। मुख्य सड़कों और संवेदनशील इलाकों में ड्रोन निगरानी तेज कर दी गई है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और त्वरित कार्रवाई की जा सके।