तेहरान में पाकिस्तान और सऊदी अरब की बैठक पर भारत की पैनी नजर है
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत तेहरान में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान की बैठक पर नजर रख रहा है।

नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि भारत अपने क्षेत्र में हो रहे सभी महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहा है। इसमें तेहरान में सऊदी अरब, तुर्की, पाकिस्तान और ईरान के अधिकारियों के बीच हुई बैठक भी शामिल है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि हम क्षेत्र में होने वाले उन सभी बड़े बदलावों को फॉलो करते हैं जिनका असर हमारे हितों पर पड़ता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान में हुई इन चर्चाओं का मकसद क्षेत्रीय तनाव को कम करना और सऊदी अरब व यमन के हूती समूह के बीच युद्धविराम कराना था। इन बातचीत में ईरान की भूमिका एक मध्यस्थ के तौर पर बताई जा रही है।
इजरायली मीडिया की खबरों के अनुसार, इन चर्चाओं में सऊदी अरब, तुर्की, पाकिस्तान और ईरान के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। ऐसी खबरें भी आई हैं कि सऊदी अरब ने हमलों को रोकने के लिए हूतियों को वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव दिया था, हालांकि 1 बिलियन डॉलर के ट्रांसफर की खबर की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की इस्लामाबाद यात्रा और वहां हुए करीब 20 समझौतों पर जायसवाल ने कहा कि मालदीव के साथ भारत के रिश्ते 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति और 'सागर' विजन पर आधारित हैं। उन्होंने मालदीव को एक महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए कहा कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों को ध्यान में रखते हुए माले के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पाकिस्तान के प्रति भारत की राजनयिक नीति पर पूछे गए सवाल के जवाब में प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि पुलवामा आतंकी हमले और उसके बाद की घटनाओं के बाद भारत का जो स्टैंड था, वह अब भी वैसा ही है। उन्होंने बताया कि यह नीति पूरी तरह लागू है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
बता दें कि पिछले करीब एक दशक से इस्लामाबाद में भारत का हाई कमिश्नर स्तर का प्रतिनिधित्व नहीं रहा है।