मेकोंग-गंगा सहयोग के तहत भारत और म्यांमार ने पांच क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स के लिए समझौते पर किए हस्ताक्षर

नैप्यीडॉ (म्यांमार): भारत और म्यांमार ने मेकोंग-गंगा सहयोग (MGC) पहल के ढांचे के भीतर पांच क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स (QIPs) के लिए समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। म्यांमार में भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को बताया कि इन प्रोजेक्ट्स में जल, स्वच्छता और स्वच्छता (WASH) सहायता, बॉयलर संचालन, सड़कों का उन्नयन, खेल सुविधाएं और सॉफ्टवेयर सहायता शामिल हैं।
समझौते पर हस्ताक्षर करने का कार्यक्रम गुरुवार को नैप्यीडॉ में आयोजित किया गया। भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव अमित श्रीअंश और म्यांमार के संबंधित मंत्रालयों के महानिदेशकों ने इन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर म्यांमार में भारत के राजदूत अभय ठाकुर और म्यांमार के राष्ट्रीय योजना, निवेश और विदेशी आर्थिक संबंधों के केंद्रीय मंत्री यू आंग क्यू हो मौजूद थे।
भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि ये प्रोजेक्ट म्यांमार के लोगों के लाभ के लिए स्थानीय सामुदायिक परियोजनाओं का समर्थन करेंगे। इससे पहले जुलाई में राजदूत अभय ठाकुर ने इनले, ताउंगी के भूकंप प्रभावित जातीय निवासियों के 50 घरों के लिए सोलर सिस्टम सौंपे थे, जो इसी पहल का हिस्सा था।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत और म्यांमार के द्विपक्षीय संबंधों में विकास सहयोग एक मुख्य हिस्सा रहा है। भारत की सहायता में बड़े कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण से लेकर कृषि अनुसंधान, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आईटी और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में क्षमता निर्माण के कार्यक्रम शामिल हैं।
भारत सरकार ने मेकोंग-गंगा सहयोग तंत्र के तहत इन क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की है ताकि कम समय में दिखने वाले विकास परिणाम दिए जा सकें। विदेश मंत्रालय ने बताया कि ये प्रोजेक्ट स्थानीय जरूरतों को पूरा करने और तेजी से लाभ पहुंचाने के लिए छोटे और समयबद्ध हस्तक्षेप करते हैं।
क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स के ढांचे के तहत भारत सरकार ने ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए प्रति वर्ष 5 लाख अमेरिकी डॉलर तक खर्च करने की प्रतिबद्धता जताई है। इस साल मार्च तक म्यांमार के विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में 25 से अधिक प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें नवीकरणीय ऊर्जा, नागरिक बुनियादी ढांचा, कृषि, ग्रामीण विकास, शिक्षा, हथकरघा, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और सांस्कृतिक बहाली जैसे क्षेत्र शामिल हैं।