भारत और नीदरलैंड के बीच व्यापार को जल्द से जल्द दोगुना करना चाहते हैं डच व्यापार मंत्री
नीदरलैंड के व्यापार मंत्री ने भारत के साथ व्यापार दोगुना करने और सेमीकंडक्टर व लॉजिस्टिक्स में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है।

द हेग (नीदरलैंड): नीदरलैंड के विदेश व्यापार और विकास सहयोग मंत्री स्योर्ड स्योर्ड्समा ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को जल्द से जल्द दोगुना करने की इच्छा जताई है। उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग, बंदरगाहों की कनेक्टिविटी और ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को आर्थिक रिश्तों को बढ़ाने के लिए मुख्य क्षेत्र बताया है।
मंत्री स्योर्ड्समा के मुताबिक दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने सेमीकंडक्टर उद्योग को भविष्य की ग्रोथ के लिए एक बड़ा जरिया बताया। उन्होंने कहा कि इसकी संभावनाएं लगभग असीमित हैं और वह चाहते हैं कि यह व्यापार जल्द से जल्द दोगुना हो जाए।
नीदरलैंड की सेमीकंडक्टर तकनीक की ताकत का जिक्र करते हुए उन्होंने डच कंपनी ASML और भारत के टाटा ग्रुप के बीच सहयोग का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा और नीदरलैंड की तकनीकी विशेषज्ञता मिलकर द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को एक नया आयाम दे सकते हैं।
लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर स्योर्ड्समा ने कहा कि नीदरलैंड पहले से ही रोटरडम पोर्ट के जरिए कई भारतीय बंदरगाहों के साथ गहन सहयोग कर रहा है। चूंकि दोनों देश सामान की आवाजाही पर काफी निर्भर हैं, इसलिए वे पोर्ट-टू-पोर्ट लिंक को गहरा करने और ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर विकसित करने के अवसरों पर काम करेंगे।
मंत्री ने कहा कि केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की रोटरडम पोर्ट की हालिया यात्रा के बाद अब ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने में राजनीतिक भरोसे की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि भारत और नीदरलैंड के रिश्ते इस समय अपने सबसे अच्छे दौर में हैं।
स्योर्ड्समा ने पीयूष गोयल से मुलाकात पर खुशी जताई और अगले साल जनवरी में भारत आने का निमंत्रण स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारतीय मंत्री भारतीय कंपनियों को नीदरलैंड ला रहे हैं, उसी तरह वे भी अपनी कंपनियों को भारत लाना चाहते हैं क्योंकि इस रिश्ते से दोनों पक्षों को फायदा होगा।
उन्होंने आगे कहा कि डच इनोवेशन और भारतीय प्रतिभा व कौशल उद्योगों में गहरे सहयोग के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं। दोनों देश टेक्नोलॉजी, ट्रेड और लॉजिस्टिक्स के साथ-साथ भारत और यूरोपीय संघ के बीच वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।