भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड समझौते पर जल्द लगेगी मुहर, वैश्विक व्यापार को मिलेगी नई ताकत

दुनियाभर में बढ़ते टैरिफ और व्यापार नियमों को लेकर अनिश्चितता के बीच, New Zealand के व्यापार और निवेश मंत्री Todd McClay ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले फ्री ट्रेड समझौते यानी एफटीए को दुनिया के लिए एक बड़ी उम्मीद बताया है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि यह समझौता इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे आपसी भरोसे और तय नियमों के जरिए देश और वहां के व्यापारी आगे बढ़ सकते हैं। दोनों देशों के बीच यह महत्वपूर्ण समझौता अगले एक महीने के भीतर पूरी तरह से लागू होने की उम्मीद है, जिसके लिए भारत और न्यूजीलैंड के अधिकारी आधिकारिक दस्तावेजों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया पर तेजी से काम कर रहे हैं। मंत्री ने जानकारी दी कि न्यूजीलैंड की संसद में इस समझौते को पहले ही भारी समर्थन मिल चुका है और वहां की संसद में इसे जरूरी मंजूरी भी मिल चुकी है।
पहले ही दिन से मिलेगा शून्य-टैरिफ का फायदा
इस समझौते के लागू होते ही भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में बड़ा फायदा मिलने जा रहा है। समझौते के तहत पहले ही दिन से भारत से न्यूजीलैंड भेजी जाने वाली हर एक वस्तु पर शून्य-टैरिफ यानी किसी प्रकार का टैक्स नहीं लगेगा। इससे खासकर फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, मशीनरी और विभिन्न सेवाओं से जुड़े कारोबारियों को बहुत फायदा होगा। मंत्री Todd McClay ने साफ किया कि भारत से जो भी सामान वहां बेचा जाएगा, उस पर शुरुआती दिन से ही कोई आयात शुल्क नहीं वसूला जाएगा। इसके साथ ही न्यूजीलैंड की कंपनियों को भी भारत के विशाल बाजार तक आसानी से पहुंच मिलेगी, जिससे खाद्य सामग्री, सेवाएं और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।
व्यापार को दोगुना करने का बड़ा लक्ष्य
भारत और न्यूजीलैंड ने आने वाले कुछ सालों में यानी साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच कुल कारोबार करीब 4 अरब न्यूजीलैंड डॉलर का है, और मंत्रियों को पूरा भरोसा है कि तय समय से पहले ही इस आंकड़े को पार कर लिया जाएगा। न्यूजीलैंड के आधिकारिक फ्रेमवर्क के अनुसार, साल 2030 तक इस व्यापार को 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक ले जाने की पूरी तैयारी है। इस समझौते से बुनियादी ढांचे, मैन्युफैक्चरिंग, विज्ञान और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में दोनों तरफ निवेश को बढ़ावा मिलेगा। मंत्री ने एक मिसाल देते हुए बताया कि न्यूजीलैंड की एक कंपनी भारत में अपनी नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने की योजना बना रही है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को और मजबूती मिलेगी।
छात्रों और उड़ानों से जुड़े अहम बदलाव
इस समझौते में केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि आम लोगों के जुड़ाव यानी पीपल-टू-पीपल कनेक्टिविटी पर भी पूरा जोर दिया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय छात्रों का न्यूजीलैंड में हमेशा स्वागत किया जाता रहेगा। वहां मास्टर डिग्री और पीएचडी पूरी करने वाले छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद अधिक समय तक काम करने के पुराने नियम जारी रहेंगे, जिससे युवा अपनी पढ़ाई के बाद अच्छा अनुभव लेकर भारत लौट सकें जब देश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही हो। इसके अलावा, आने वाले लगभग एक साल के भीतर भारत और न्यूजीलैंड के बीच सीधी उड़ानों का संचालन भी शुरू हो सकता है, जिससे पर्यटन, बिजनेस यात्रा और परिवारों का आना-जाना बहुत आसान हो जाएगा। दोनों देशों ने केवल नौ महीने की रिकॉर्ड बातचीत के बाद इस डील को अंतिम रूप दिया है, जिसमें आपसी राजनीतिक भरोसा सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ। इस पूरी अपडेट की विस्तृत जानकारी आप ANI News की रिपोर्ट में देख सकते हैं।