भारत ने बांग्लादेश के समझौतों पर दिया बड़ा बयान, कहा राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेंगे.

Praggya Singh sabal18 September 20264 min read29 viewsIndia
भारत ने बांग्लादेश के समझौतों पर दिया बड़ा बयान, कहा राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेंगे.

नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब मीडिया में खबरें चल रही हैं कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी यानी BNP के नेतृत्व वाला प्रशासन पिछली अवामी लीग सरकार के दौरान हुए 101 द्विपक्षीय समझौतों की समीक्षा कर रहा है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि भारत ने इस मामले में मीडिया की खबरें देखी हैं लेकिन ढाका की तरफ से आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपने हितों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और जरूरी कार्रवाई करेगा। शेख हसीना की सरकार के हटने के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक हालात बदले हैं और अब वहां एक अंतरिम कैबिनेट के साथ छात्र आंदोलन से जुड़े लोग और राजनीतिक दल मिलकर काम कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 15 सालों में हुए समझौतों और एमओयू की जांच की जा रही है ताकि यह देखा जा सके कि वे देश के हित में हैं या नहीं। हालांकि अभी तक किसी भी प्रोजेक्ट को पूरी तरह से रद्द करने का आदेश नहीं दिया गया है और हर एक मामले की अलग से जांच हो रही है।

पारगमन और ऊर्जा समझौतों पर हो रही है समीक्षा

पुरानी व्यवस्था के तहत भारत को अपने उत्तर-पूर्वी राज्यों में सामान भेजने के लिए बांग्लादेश के चटगांव और मोंगला बंदरगाहों का इस्तेमाल करने की अनुमति मिली हुई थी। अब बांग्लादेशी अधिकारी इस ट्रांजिट फीस और रूट के नियमों की फिर से जांच कर रहे हैं उनका मानना है कि पहले की शर्तें उनके पक्ष में संतुलित नहीं थीं। हालांकि पूरी तरह से इसे बंद करने की संभावना कम है क्योंकि इससे राजस्व मिलता है लेकिन लागत बढ़ने से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए परिवहन का खर्च बढ़ सकता है। इसके अलावा बांग्लादेश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयातित बिजली पर निर्भर करता है जिसमें भारत के अडानी पावर गोड्डा प्लांट से मिलने वाली बिजली और डीजल पाइपलाइन शामिल हैं। विदेशी मुद्रा की कमी के कारण बिजली खरीद समझौतों के भुगतान में देरी हो रही है और वित्तीय रूप से फिर से बातचीत करने की मांग उठ रही है। हालांकि बांग्लादेश की तुरंत की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए बिजली की सप्लाई पूरी तरह बंद होने की उम्मीद कम है। सुरक्षा के मोर्चे पर पिछले शासन के दौरान भारत विरोधी उग्रवादी समूहों को सीमा के पास शरण नहीं दी जाती थी और सीमा सुरक्षा का सहयोग अभी भी जारी है लेकिन राजनीतिक बदलावों के कारण कुछ अनिश्चितता जरूर पैदा हुई है। नई दिल्ली सीमा पार तस्करी और अवैध घुसपैठ रोकने के लिए ढाका के सुरक्षा बलों पर निर्भर करती है।

गंगा जल संधि और तीस्ता नदी के मुद्दों पर बातचीत जारी

भारत ने बांग्लादेश में रेलवे, सड़क और बंदरगाह परियोजनाओं के लिए 7 अरब डॉलर से अधिक की लाइन ऑफ क्रेडिट दी थी जिसमें से कई परियोजनाएं अब ढाका के योजना मंत्रालय की जांच के दायरे में हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन प्रोजेक्ट्स में देरी या फंड रोकने से भारतीय पूंजी के इस्तेमाल पर असर पड़ सकता है। बांग्लादेश की विदेश नीति अब चीन, अमेरिका और आसियान देशों के साथ अधिक संतुलित संबंध बनाने की दिशा में काम कर रही है। दूसरी तरफ 30 साल पुरानी गंगा जल बंटवारे की संधि को लेकर भी चर्चा चल रही है जो कि 12 दिसंबर 1996 को साइन हुई थी और दिसंबर 2026 में खत्म होने वाली है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों देशों के बीच पानी से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए संयुक्त नदी आयोग यानी Joint Rivers Commission का तंत्र काम कर रहा है और तकनीकी स्तर की बैठकें लगातार हो रही हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 नदियां साझा हैं और पानी के मामलों को इन्ही स्थापित द्विपक्षीय तंत्रों के जरिए सुलझाया जाता है। तीस्ता नदी के मुद्दे पर भी बातचीत जारी है हालांकि साल 2011 में एक समझौता प्रस्तावित हुआ था जिसमें भारत को 42.5 प्रतिशत और बांग्लादेश को 37.5 प्रतिशत पानी मिलने की बात थी लेकिन पश्चिम बंगाल के विरोध के कारण वह आगे नहीं बढ़ पाया था। भारत सरकार का कहना है कि दोनों देश आपसी बातचीत और तयशुदा तंत्र के माध्यम से सभी मुद्दों का समाधान निकालने के लिए लगातार संपर्क में हैं।

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