भारत से रूस को भारी मात्रा में ईंधन सप्लाई, अगस्त में कुल आयात का 70 प्रतिशत हिस्सा भेजा गया.

भारत ने अगस्त के महीने में रूस को कच्चे तेल और ईंधन की आपूर्ति में एक नया रिकॉर्ड बनाया है। सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के कुल तेल उत्पाद आयात का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत से गया है। इस दौरान भारत की रिफाइनरी से रूस को भारी मात्रा में पेट्रोल भेजा गया, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते की एक अलग तस्वीर सामने आ रही है। रूस इस समय अपने घरेलू स्तर पर ईंधन की भारी कमी से जूझ रहा है और इसकी मुख्य वजह उनके खुद के ऊर्जा ढांचे पर होने वाले हमले हैं।
अगस्त महीने के आंकड़े और आंकड़े की पूरी जानकारी
ऊर्जा और स्वच्छ हवा पर नजर रखने वाले संगठन Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) द्वारा जारी विश्लेषण के अनुसार, रूस ने अगस्त के पूरे महीने में कुल 172,000 टन तेल उत्पादों का आयात किया था। इन सभी शिपमेंट की कुल कीमत करीब 114 मिलियन यूरो यानी भारतीय रुपयों में एक बड़ी रकम बैठती है। इस कुल आयात में से अकेले भारत ने रूस को 94 प्रतिशत पेट्रोल उपलब्ध कराया, जिसकी मात्रा 120,000 टन थी और इसकी कीमत करीब 78 मिलियन यूरो आंकी गई है।
हिन्दू बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात के वदिनाड़ (Vadinar) स्थित रिफाइनरी से लोड किए गए इस विशिष्ट पेट्रोल शिपमेंट की कीमत लगभग 90 मिलियन डॉलर थी। यह सारा ईंधन Nayara Energy द्वारा बेचा गया था और इसे रूस की प्रमुख कंपनी Rosneft ने खरीदा था। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रोसनेफ्ट की नायरा एनर्जी में करीब 49.13 प्रतिशत हिस्सेदारी है। रिकॉर्ड बताते हैं कि वदिनाड़ रिफाइनरी ने साल 2026 के पहले आठ महीनों में अपनी कुल जरूरत का 100 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से ही खरीदा, जो कि साल 2025 के दौरान 81 प्रतिशत हुआ करता था।
ईंधन की ढुलाई और रूट की पूरी प्रक्रिया
रूस तक पेट्रोल पहुंचाने के लिए अपनाए गए रास्ते और रसद पर भी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। पेट्रोल का हर एक कार्गो मिस्र के तट के पास स्थित Damietta Lightering Zone में जहाज से जहाज (ship-to-ship) ट्रांसफर के जरिए आगे बढ़ा। इसके बाद इस ईंधन को आर्कटिक बंदरगाह Beloe More पर खाली किया गया। इस बात की पुष्टि CREA की अगस्त 2026 की मासिक रिपोर्ट से होती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन सभी शिपमेंट के लिए जिन छह जहाजों का इस्तेमाल किया गया था, वे सभी प्रतिबंधित टैंकर थे और उनमें से चार जहाजों ने पिछले दो सालों के भीतर फर्जी झंडे का इस्तेमाल किया था।
कच्चे तेल और ईंधन की आवाजाही पर नजर रखने वाली अन्य एजेंसियों जैसे Vortexa और Kpler ने भी पहले इस तरह के रूट को देखा था। उनका भी यही कहना था कि भारतीय पेट्रोल भूमध्यसागरीय ट्रांसफर के जरिए प्रतिबंधित बेड़े के माध्यम से रूस की ओर जा रहा है। हालांकि, वदिनाड़ रिफाइनरी से एक महीने में 120,000 टन ईंधन भेजने का आधिकारिक और सार्वजनिक आंकड़ा पहली बार किसी संस्था ने जारी किया है।
रूस में घरेलू उत्पादन क्यों घटा
साल 2023 से 2025 के बीच रूस आमतौर पर हर महीने 5,000 टन से भी कम समुद्री रिफाइंड उत्पादों का आयात करता था। स्थिति यह थी कि उन 36 महीनों में से 13 महीने ऐसे थे जब एक भी कार्गो रूस के बंदरगाहों पर नहीं उतरा था। उस दौरान कुल आयातित उत्पादों में पेट्रोल की हिस्सेदारी सिर्फ 6 प्रतिशत थी, जो अगस्त 2026 में अचानक बढ़कर 74 प्रतिशत पर पहुंच गई।
यूक्रेन की तरफ से रूस की रिफाइनरियों पर लगातार ड्रोन हमले किए जा रहे हैं, जिसकी वजह से रूस की अपनी घरेलू उत्पादन क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है। CREA की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त महीने में रूस के समुद्री तेल उत्पाद निर्यात में मात्रा के हिसाब से 21 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। रूसी बंदरगाहों से माल की लदान लगातार तीन महीनों से कम हो रही है और वर्तमान में यह अगस्त 2025 के स्तर से भी आधे से कम पर चल रही है।
बंदरगाहों पर असर और सरकारी प्रतिबंध
तुआप्से (Tuapse) बंदरगाह, जो कभी रूसी उत्पाद निर्यात के मामले में चौथा सबसे बड़ा बंदरगाह हुआ करता था, वहां लगातार तीसरे महीने एक भी जहाज लोड नहीं किया गया। इसके अलावा, नोवोरोस्सियस्क (Novorossiysk) में कच्चे तेल की लोडिंग पिछले महीने की तुलना में 58 प्रतिशत तक गिर गई, क्योंकि वहां नौ दिनों तक काम पूरी तरह बंद रहा था। घरेलू बाजार में ईंधन की किल्लत से निपटने के लिए मास्को सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर लगे प्रतिबंध को बढ़ाकर जनवरी 2027 तक के लिए टाल दिया है।
गुजरात के वदिनाड़ में स्थित नायरा एनर्जी भारत की दूसरी सबसे बड़ी सिंगल-साइट रिफाइनरी का संचालन करती है। कंपनी की सालाना रिफाइनिंग क्षमता करीब 20 मिलियन टन है और देश भर में इसके करीब 6,500 ईंधन स्टेशन मौजूद हैं। अकेले नायरा एनर्जी भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता में लगभग 8 प्रतिशत का योगदान देती है।
यूरोपीय संघ ने जुलाई 2025 में रोसनेफ्ट की हिस्सेदारी का हवाला देते हुए इस कंपनी पर प्रतिबंध लगा दिए थे। उस समय नायरा एनर्जी ने इन प्रतिबंधों को अनुचित बताया था, जबकि रोसनेफ्ट का कहना था कि इस कदम से ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। बाद में भारतीय अधिकारियों ने कंपनी को घरेलू बाजार की आपूर्ति सुचारू रखने के लिए सीमित तटीय शिपिंग की अनुमति दे दी थी। इस पूरे मामले पर भारतीय सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।