रेड सागर ऊर्जा सप्लाई लाइन की सुरक्षा पर पूर्व राजनयिक का बयान, भारत को रखनी होगी सावधानी.

Praggya Singh sabal17 September 20263 min read37 viewsIndia
रेड सागर ऊर्जा सप्लाई लाइन की सुरक्षा पर पूर्व राजनयिक का बयान, भारत को रखनी होगी सावधानी.

भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए Red Sea के रास्ते आने वाले तेल और गैस सप्लाई की सुरक्षा को लेकर खास सतर्कता बरतनी होगी। पूर्व राजनयिक Vidya Bhushan Soni ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान यह बात कही है कि भारत को Bab-el-Mandeb Strait के जरिए होने वाले व्यापार को सुरक्षित रखना जरूरी है। इसके साथ ही उन्हें यमन के Houthi rebels के साथ किसी भी तरह के तनाव से बचना होगा ताकि देश के आर्थिक हितों पर कोई आंच न आए।

भारत के लिए क्यों जरूरी है लाल सागर का यह रास्ता

नई दिल्ली में ANI से बातचीत करते हुए पूर्व राजनयिक ने साफ किया कि भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा समुद्री रास्तों से मंगाता है। इसमें Strait of Hormuz और Bab-el-Mandeb Strait सबसे अहम रास्ते माने जाते हैं। चूंकि Bab-el-Mandeb वाला पूरा इलाका हुती विद्रोहियों के नियंत्रण में आता है, इसलिए भारत को अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाकर चलना होगा। यदि यह समुद्री मार्ग किसी वजह से बंद होता है या इस पर कोई संकट आता है, तो भारत के आर्थिक हितों को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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उन्होंने आगे बताया कि भारत एक तरफ अमेरिका के रुख का समर्थन करता है, लेकिन वह किसी भी कीमत पर हुती विद्रोहियों को नाराज नहीं करना चाहता है। अगर विद्रोही इस रूट पर कोई सख्त कदम उठाते हैं, तो भारत के लिए ऊर्जा आयात के मोर्चे पर बहुत मुश्किल स्थिति पैदा हो सकती है। यही कारण है कि कूटनीतिक स्तर पर बेहद सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है ताकि देश में ईंधन की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रहे।

सऊदी अरब और हुती विद्रोहियों के बीच संघर्ष

सऊदी अरब और हुती विद्रोहियों के आपसी तनाव पर चर्चा करते हुए पूर्व राजनयिक ने बताया कि सऊदी सेना के पास दुनिया के सबसे आधुनिक और महंगे हथियार मौजूद हैं, लेकिन मैदानी इलाकों में पारंपरिक लड़ाई के बजाय गुरिल्ला युद्ध शैली के आगे उनकी तकनीकी बढ़त बेअसर साबित होती है। हुती लड़ाके सामने आकर सीधे युद्ध करने के बजाय अचानक हमला करके गायब हो जाते हैं, जिससे निपटना सऊदी सैनिकों के लिए आसान नहीं रहा है।

उन्होंने हाल ही में मक्का पर ड्रोन हमले के दावों का जिक्र करते हुए कहा कि सऊदी अरब को सुरक्षा के मोर्चे पर लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, हुती विद्रोहियों ने स्पष्ट किया है कि वे अमेरिकी या इजरायली ठिकानों को निशाना नहीं बनाएंगे ताकि अमेरिका का ध्यान मुख्य रूप से ईरान संकट पर ही केंद्रित रहे और वह इस क्षेत्रीय संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल न हो।

हुती विद्रोहियों का आधिकारिक पक्ष और मक्का हमले पर सफाई

दूसरी तरफ, यमन के हुती आंदोलन ने सऊदी अरब के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि समूह ने पवित्र शहर मक्का की तरफ कोई ड्रोन दागा था। हुती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Yahya Saree ने टेलीग्राम पर जारी अपने एक बयान में इन आरोपों को पूरी तरह झूठ और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने कहा कि उनके संगठन के निशाने पर केवल सऊदी सैन्य ठिकाने और तेल सुविधाएं हैं, जिनका पवित्र इस्लामिक स्थलों से कोई लेना-देना नहीं है।

सऊदी नीत गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल Turki Al-Malki ने इस घटना के बारे में जानकारी दी थी कि उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने मंगलवार शाम को मक्का के पास एक ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया था। गठबंधन ने इस पूरी कार्रवाई को आतंकवादी कृत्य करार दिया था और स्पष्ट किया था कि दो पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा उनके लिए एक बड़ी रेड लाइन है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच ANI की रिपोर्ट के मुताबिक लाल सागर के रणनीतिक मार्ग पर लगातार बढ़ रहे तनाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

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