भारत ने ठुकराया सिंधु जल संधि पर अंतरराष्ट्रीय अदालत का फैसला, अवैध बताया ट्रिब्यूनल.

Sushma Kumari31 August 20263 min read3 viewsIndia
भारत ने ठुकराया सिंधु जल संधि पर अंतरराष्ट्रीय अदालत का फैसला, अवैध बताया ट्रिब्यूनल.

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने 31 अगस्त 2026 को हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आबिट्रेशन यानी PCA के उस फैसले को आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया है, जिसमें 1960 की सिंधु जल संधि को बनाए रखने की बात कही गई थी। भारत ने साफ तौर पर कहा है कि विश्व बैंक द्वारा यह ट्रिब्यूनल अवैध तरीके से बनाया गया था और संधि के नियमों के खिलाफ था, इसलिए इसे भारत के संप्रभु फैसलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे और रणनीतिक मामलों को लेकर तनाव एक बार फिर से गहरा गया है, जिस पर दुनियाभर के जानकारों की नजर बनी हुई है।

अदालत का फैसला और भारत का रुख

अपने एक सर्वसम्मति वाले फैसले में PCA ने कहा कि भारत के पास इस संधि को निलंबित करने या खत्म करने का कोई ठोस आधार नहीं था। इसके साथ ही अदालत ने अंतरिम निर्देश जारी करते हुए कहा कि भारत जम्मू और कश्मीर में स्थित रातले हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर बांध की दीवार और पावर इनटेक स्ट्रक्चर के निर्माण कार्य को एक निश्चित स्तर से आगे नहीं बढ़ाएगा। अदालत के ये प्रतिबंध तब तक लागू रहेंगे जब तक कि विश्व बैंक द्वारा नियुक्त न्यूट्रल एक्सपर्ट प्रोजेक्ट की अनुपालन रिपोर्ट पर अपना अंतिम फैसला नहीं सुना देते, जिसकी उम्मीद जुलाई 2027 तक की जा रही है। भारत ने इस पूरी कार्यवाही में शामिल होने से लगातार इनकार किया है क्योंकि भारत का मानना है कि अप्रैल 2025 में आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए कदमों के तहत सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला पूरी तरह से सही था और वह अभी भी लागू है।

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पहलगाम हमले के बाद लिया गया था कड़ा फैसला

भारत ने कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकी हमले के बाद अप्रैल 2025 में सिंधु जल संधि को रोक दिया था। भारत का आरोप था कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हाथ था, हालांकि पाकिस्तान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। भारत की तरफ से यह कदम देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया था, जिस पर सरकार आज भी पूरी तरह से कायम है। भारत का यह स्पष्ट रुख रहा है कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद बंद नहीं होता, तब तक सामान्य तरीके से द्विपक्षीय संधियों पर आगे बढ़ना संभव नहीं है।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और पुराना विवाद

दूसरी तरफ पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे पाकिस्तान की उस बात पर मुहर लग गई है कि इस संधि को कोई भी देश एकतरफा तरीके से रद्द नहीं कर सकता है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने भारत से अपील की है कि वह सामान्य तरीके से संधि के नियमों का पालन करे और अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को पूरा करे। यह पूरा विवाद अगस्त 2016 में पाकिस्तान द्वारा पश्चिमी नदियों को लेकर शुरू की गई मध्यस्थता की कार्यवाही से जुड़ा हुआ है, जिस पर जुलाई 2023 में भी PCA ने अपनी सक्रियता दिखाई थी। यह पूरा टकराव मुख्य रूप से जम्मू और कश्मीर में चल रही रातले और किशनगंगा जलविद्युत परियोजनाओं के आसपास ही घूम रहा है।

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