PM मोदी का बड़ा विजन: 20 नवंबर को दिल्ली में होगा SCO सिविलइजेशन डायलॉग फोरम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव पर अमल करते हुए, भारत अब शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के भीतर सांस्कृतिक और सभ्यतागत आदान-प्रदान को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। भारत के SCO राष्ट्रीय समन्वयक आलोक डिमरी ने घोषणा की है कि SCO सिविलइजेशन डायलॉग फोरम का पहला संस्करण 20 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।
क्षेत्रीय समृद्धि और कनेक्टिविटी पर जोर
इस महत्वपूर्ण फोरम का मुख्य उद्देश्य यूरेशियाई और एशियाई देशों के सामूहिक कल्याण को सुनिश्चित करना है। आलोक डिमरी ने बताया कि इस पहल के एजेंडे में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है:
- क्षेत्रीय कनेक्टिविटी: देशों के बीच संपर्क को मजबूत करना।
- व्यापार और पारगमन: व्यापारिक मार्गों और ट्रांजिट सुविधाओं में सुधार।
- सामूहिक समृद्धि: पूरे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना।
यह मंच न केवल व्यापार बल्कि भारतीय और फारसी सभ्यताओं के बीच गहरे संबंधों को भी उजागर करेगा, जो इस क्षेत्र की पहचान रहे हैं।
SCO में अंग्रेजी भाषा की भूमिका बढ़ेगी
दिसंबर में होने वाले इस कार्यक्रम के साथ-साथ, भारत ने SCO के भीतर भाषाई विविधता और संचार को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। डिमरी के अनुसार, अब तक SCO की चर्चाएं मुख्य रूप से रूसी और चीनी भाषाओं में होती रही हैं, लेकिन अब अंग्रेजी को भी एक आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल करने की संभावना बढ़ गई है। इससे सदस्य देशों के बीच विचारों का आदान-प्रदान और अधिक सुगम हो सकेगा।
भारत की प्रमुख पहलें और भविष्य की राह
भारत ने बिश्केक घोषणापत्र में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों का नेतृत्व किया है, जो SCO के भविष्य को आकार देंगे। इनमें शामिल हैं:
- सिविलइजेशन डायलॉग फोरम: सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए।
- यंग साइंटिस्ट फोरम: युवा वैज्ञानिकों को मंच देने के लिए।
- यंग ऑथर्स कॉन्क्लेव: नए लेखकों और विचारकों के लिए।
"यह यात्रा यूरेशियाई और एशियाई राष्ट्रों को एक साथ लाती है। हमने एक ऐसा एजेंडा तैयार किया है जो हमारे साझा कल्याण और समृद्धि पर केंद्रित है," आलोक डिमरी ने अपने संबोधन में कहा। यह फोरम वैश्विक मंच पर एशियाई देशों की भाषा और उनके दृष्टिकोण को साझा करने का एक सुनहरा अवसर साबित होगा।