श्रीलंका को भारत की बड़ी मदद: सौंपी 3 टन एंटी-टीबी दवाएं

पड़ोसी देश श्रीलंका की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और टीबी (तपेदिक) जैसी गंभीर बीमारी से लड़ने में मदद के लिए भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है। भारत ने श्रीलंका को 3 टन आवश्यक एंटी-टीबी दवाइयों की खेप सौंपी है, जो वहां के मरीजों के इलाज और बीमारी के नियंत्रण में बेहद मददगार साबित होगी।
इस महत्वपूर्ण सहायता को श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने वहां के स्वास्थ्य और जनसंचार मंत्री नलिंदा जयातिसा को सौंपा। इस मौके पर उच्चायुक्त संतोष झा ने कहा कि भारत टीबी के खिलाफ लड़ाई में श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा है। यह दवाएं न केवल इलाज में मदद करेंगी, बल्कि श्रीलंका की स्वास्थ्य प्रणाली को भी और अधिक सशक्त बनाएंगी।
स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए भारत का प्रयास
यह मदद अचानक नहीं आई है, बल्कि भारत की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले 28 सितंबर को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जानकारी दी थी कि इन दवाइयों को भारतीय वायु सेना के C130J विमान के जरिए कोलंबो भेजा गया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह श्रीलंका के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को बेहतर बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
दवाइयों के अलावा, भारत श्रीलंका में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास में भी निवेश कर रहा है। हाल ही में मन्नार के जिला जनरल अस्पताल में एक नई दो मंजिला 'एक्सीडेंट एंड इमरजेंसी यूनिट' का काम शुरू किया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए भारत सरकार ने 600 मिलियन श्रीलंकाई रुपयों का अनुदान दिया है।
इस अस्पताल इकाई के शिलान्यास समारोह में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और स्वास्थ्य मंत्री नलिंदा जयातिसा भी शामिल हुए थे। इस नई यूनिट में आधुनिक चिकित्सा उपकरण लगाए जाएंगे, ताकि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को 'गोल्डन आवर' (शुरुआती महत्वपूर्ण समय) के दौरान तुरंत इलाज मिल सके और उनकी जान बचाई जा सके।
उच्चायुक्त संतोष झा ने इन प्रयासों को भारत और श्रीलंका के बीच गहरे द्विपक्षीय संबंधों का प्रमाण बताया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों की सरकारें लोगों के विकास और उनके स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए मिलकर काम कर रही हैं।