नेपाल में बाढ़ पीड़ितों के लिए भारत ने भेजी दूसरी राहत सामग्री, C-17 विमान से पहुंचा 37.5 टन सामान.

नेपाल में मानसूनी बारिश और भयानक बाढ़ के कारण मची तबाही के बाद भारत सरकार ने मदद का हाथ एक बार फिर आगे बढ़ाया है। 27 अगस्त 2026 को भारत की तरफ से एक और विमान नेपाल भेजा गया, जिसमें राहत और बचाव कार्य के लिए जरूरी सामान ले जाया गया है। इस आपदा में अब तक कम से कम 162 लोगों की जान जा चुकी है और कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। भारत के इस मानवीय कदम से नेपाल के लोगों को इस मुश्किल समय में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
भारतीय वायुसेना के विमान से भेजी गई मदद
इस दूसरी खेप में कुल 37.5 टन राहत सामग्री भेजी गई है, जिसमें जरूरी दवाइयां और खाने के पैकेट शामिल हैं। इस पूरी सामग्री को भारतीय वायुसेना के बड़े परिवहन विमान C-17 ग्लोबमास्टर के जरिए नेपाल भेजा गया। इससे पहले 26 अगस्त 2026 को भी भारत ने पहला राहत विमान भेजा था, जिसमें 10 टन सामान था। उस पहली खेप में अस्थायी तंबू, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल थीं। उस समय वह सामान भारतीय वायुसेना के C-130J हरक्यूलिस विमान से काठमांडू पहुंचा था, जिसे नेपाल के संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क राज पौडेल ने नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से आधिकारिक रूप से प्राप्त किया था।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दी जानकारी
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस दूसरी उड़ान के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि नेपाल के लिए 37.5 टन राहत सामग्री, दवाइयां और खाने के पैकेट लेकर दूसरा विमान रवाना हो चुका है। विदेश मंत्री ने दोहराया कि भारत काठमांडू में चल रहे खोज और बचाव अभियानों में पूरा समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है और भारतीय अधिकारी लगातार अपने नेपाली समकक्षों के संपर्क में बने हुए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी नेपाल के साथ भारत के मजबूत खड़े होने की बात दोहराई और कहा कि सरकार हर संभव मदद देने के लिए तैयार है।
नेपाल सरकार ने जताया आभार
नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास ने एक बयान जारी कर भारत सरकार और वहां के लोगों की एकजुटता तथा तुरंत मदद के लिए धन्यवाद दिया। यह सारी सहायता भारत की प्रसिद्ध 'पड़ोसी पहले' (Neighbourhood First) नीति के तहत दी जा रही है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नेपाल में नदियां उफान पर हैं, जिससे बुनियादी ढांचे, घरों और खेती की जमीनों को भारी नुकसान हुआ है और हजारों परिवार बेघर हो गए हैं। इस आपदा से निपटने के लिए चीन, यूरोपीय संघ, अमेरिका और रेड क्रॉस सोसाइटी जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन भी राहत कार्यों में अपना योगदान दे रहे हैं।