भारत-EFTA व्यापार समझौते से बढ़ेगा व्यापार, स्विट्जरलैंड को बड़ी उम्मीद: राष्ट्रपति गाइ पारमेलिन

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच आर्थिक रिश्तों में एक नए युग की शुरुआत हो रही है। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पारमेलिन ने भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) को लेकर काफी उत्साह जताया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के लागू होने के बाद से ही स्विस कंपनियों में भारत के साथ व्यापार करने को लेकर जबरदस्त दिलचस्पी देखी गई है, जिससे आने वाले समय में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को जबरदस्त मजबूती मिलेगी।
राष्ट्रपति पारमेलिन के अनुसार, यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दीर्घकालिक निवेश, रोजगार के नए अवसरों, नवाचार और टिकाऊ विकास की नींव रखेगा। उन्होंने इसे एक 'विन-विन' स्थिति बताया, जहाँ स्विट्जरलैंड अपनी विशेष तकनीक और इनोवेशन क्षमताएं लाएगा, वहीं भारत अपनी विशाल अर्थव्यवस्था, कुशल कार्यबल और ग्लोबल वैल्यू चेन में अपनी बढ़ती भूमिका के जरिए लाभान्वित होगा।
100 अरब डॉलर के निवेश और लाखों नौकरियों का लक्ष्य
इस साझेदारी की सबसे बड़ी बात निवेश का वह लक्ष्य है, जिसने दुनिया का ध्यान खींचा है। TEPA के तहत स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन (EFTA देश) ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश की सुविधा प्रदान करने की प्रतिबद्धता जताई है। राष्ट्रपति पारमेलिन ने बताया कि इस निवेश से भारत में लगभग दस लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की संभावना है।
निवेश के मोर्चे पर प्रगति की बात करते हुए उन्होंने कहा कि स्विस कंपनियां परिवहन, लॉजिस्टिक्स, वित्तीय सेवाओं, मैन्युफैक्चरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, बायोटेक और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं या इसकी योजना बना रही हैं। इस पूरी प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए 2024 से अब तक स्विट्जरलैंड और अन्य EFTA देशों द्वारा 150 से अधिक प्रचार गतिविधियां आयोजित की गई हैं।
भारत दौरे पर आए राष्ट्रपति पारमेलिन ने यह भी साझा किया कि स्विट्जरलैंड भारत को एक रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है। विशेष रूप से जून 2027 में जेनेवा में होने वाले एआई (AI) समिट की तैयारी में भारत की भूमिका अहम होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि आर्थिक सहयोग के साथ-साथ दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंध भी और गहरे होंगे।