भारत और UAE के बीच व्यापार 101 अरब डॉलर के पार, अब 2032 तक 200 अरब का लक्ष्य.

Sushma Kumari14 September 20263 min read45 viewsUAE
भारत और UAE के बीच व्यापार 101 अरब डॉलर के पार, अब 2032 तक 200 अरब का लक्ष्य.

भारत और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के बीच द्विपक्षीय व्यापार ने एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। अमीरात समाचार एजेंसी WAM के अनुसार, 2025-26 के वित्तीय वर्ष में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार $101.25 बिलियन यानी 101.25 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह लगातार दूसरा साल है जब भारत और UAE का व्यापार 100 अरब डॉलर के आंकड़े से ऊपर गया है। दोनों देशों की सरकारों ने अब इस व्यापारिक वॉल्यूम को साल 2032 तक बढ़ाकर $200 बिलियन करने का बड़ा लक्ष्य तय किया है।

भारत और UAE के बीच आयात और निर्यात का आंकड़ा

भारत के वाणिज्य मंत्रालय यानी डिपार्टमेंट ऑफ़ कॉमर्स से मिले आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025-26 के दौरान भारत ने UAE को लगभग $37.36 बिलियन के सामान का निर्यात किया। वहीं दूसरी तरफ, UAE से भारत में कुल आयात करीब $63.89 बिलियन का रहा। इन दोनों को मिलाकर कुल मर्चेंडाइज ट्रेड $101.25 बिलियन दर्ज किया गया है। जब से भारत और UAE के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी CEPA लागू हुआ है, तब से दोनों देशों के बीच व्यापार का तरीका काफी बदला है। यह समझौता 1 मई 2022 को लागू हुआ था, जिसके बाद से कस्टम्स, बाजार तक पहुंच, मूल के नियम और निवेश को आसान बनाने पर पूरा जोर दिया जा रहा है।

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भारत मार्ट और वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर की नई पहल

आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार को और मजबूत करने के लिए कुछ बहुत ही खास रणनीतिक प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। इसमें दुबई के जेबेल अली फ्री जोन यानी JAFZA में बनने वाला Bharat Mart प्रोजेक्ट और वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर यानी VTC शामिल हैं। भारत मार्ट लगभग 2.7 मिलियन वर्ग फीट में फैला एक बहुत बड़ा ट्रेड हब होगा। इसे भारतीय निर्माताओं और निर्यातकों के लिए थोक और खुदरा बाजार के रूप में तैयार किया जा रहा है। इस आधुनिक हब में जेबेल अली पोर्ट, अल मकतूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट और एतिहाद रेल के जरिए सामान लाने और ले जाने की बेहतरीन सुविधा मिलती है। इस बड़े प्रोजेक्ट के अंदर शोरूम, वेयरहाउस, हल्के औद्योगिक यूनिट, ऑफिस और मीटिंग की जगह बनाई गई है। इसमें खास तौर पर भारतीय एमएसएमई और महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसायों के लिए अलग से जगह तय की गई है। इस हब में मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स, मेडिकल उपकरण, फर्नीचर, कपड़े, प्रोसेस्ड फूड, दवाइयां, कॉस्मेटिक्स, प्लास्टिक, रबर उत्पाद और हस्तशिल्प जैसे कई सेक्टर शामिल किए गए हैं।

डिजिटल सिस्टम और कड़े नियमों का पालन

वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर का मुख्य उद्देश्य व्यापार और कस्टम सिस्टम के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है, जिससे नियमों से जुड़े डेटा का आदान-प्रदान अपने आप हो सके। यह प्रोजेक्ट इंटरनेशनल ट्रेड एंड रेगुलेटरी इंटरफेस के मास्टर एप्लिकेशन यानी MAITRI को अपने डिजिटल बैकबोन के रूप में इस्तेमाल करता है। इसके जरिए भारत के आईसीगेट, नेशनल लॉजिस्टिक्स पोर्टल-मरीन और यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म को UAE के संबंधित प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है, ताकि कागजी कार्रवाई और सामान को क्लियर कराने में लगने वाला समय कम हो सके। हालांकि, इन डिजिटल प्रणालियों के आने से सीमा शुल्क, खाद्य सुरक्षा और क्वालिटी के नियमों से जुड़ी कानूनी जिम्मेदारियों में कोई छूट नहीं मिलती है। UAE में काम करने वाले या वहां अपना कारोबार शुरू करने वाले भारतीय व्यापारियों के लिए सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वे प्रोडक्ट के एचएस कोड, मूल के नियमों और सेक्टर के हिसाब से तय मानकों का पूरी तरह पालन करें। कंपनियों को स्थानीय आयातकों के साथ मिलकर अपने प्रोडक्ट के अप्रूवल की स्थिति की जांच करनी होगी और यह भी देखना होगा कि सामान UAE के स्थानीय बाजार के लिए है या फिर उसे किसी और देश में दोबारा भेजना है। आने वाले समय में सारा ध्यान भारत मार्ट के चालू होने के समय, वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर के लाइव कस्टम इंटीग्रेशन और IMEC जैसे बड़े बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स पर रहेगा।

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