मुंबई में भारत यूएई और अमेरिका के मंत्रियों ने ऊर्जा और सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर की त्रिपक्षीय वार्ता

Lov Singh21 October 20262 min read0 viewsEnglish
मुंबई में भारत यूएई और अमेरिका के मंत्रियों ने ऊर्जा और सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर की त्रिपक्षीय वार्ता

मुंबई: भारत, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और अमेरिका के बीच मंगलवार 20 अक्टूबर 2026 को मुंबई में उच्च स्तरीय त्रिपक्षीय वार्ता हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा, कनेक्टिविटी और तकनीकी नवाचार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और मजबूत करना था।

इस बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर शामिल हुए। यूएई के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाह्यान ने किया, जिनके साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री रीम अल हाशमी भी मौजूद थीं। अमेरिका की ओर से विदेश सचिव मार्को रूबियो ने शिरकत की।

बैठक के दौरान व्यापार, निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक और रक्षा जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्रियों ने पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता के बीच क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया।

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बातचीत में वैश्विक समुद्री मार्गों को मिलने वाले खतरों पर भी चर्चा हुई। इसमें हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी तेल बुनियादी ढांचे पर किए गए हमलों और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज व बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य के माध्यम से शिपिंग में आने वाली बाधाओं जैसे मुद्दों को उठाया गया।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस सत्र को ऊर्जा और कनेक्टिविटी पर दृष्टिकोणों के आदान-प्रदान के लिए एक उत्पादक चर्चा बताया। अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रूबियो ने कहा कि इस बैठक से साझा आर्थिक प्राथमिकताओं को गहराई से समझने का मौका मिला।

यूएई की समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएम के मुताबिक, शेख अब्दुल्ला ने तीनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों की मजबूती और विकास व समृद्धि को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

द्विपक्षीय बातचीत के दौरान मार्को रूबियो ने भारत से अमेरिकी ऊर्जा और हथियारों की खरीद बढ़ाने की वकालत की। उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सुझाव दिया था कि दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं।

चर्चाओं में वेनेजुएला के तेल की प्रोसेसिंग में भारत की संभावित भूमिका पर भी बात हुई। हालांकि, अधिकारियों ने यह साफ कर दिया कि इन मुलाकातों का मतलब कोई औपचारिक सुरक्षा गठबंधन बनाना नहीं है।

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