भारत ने संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद और लश्कर-ए-तैबा को पनाह देने वाले देशों पर साधा निशाना.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की हालिया बैठक में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने दुनिया भर के देशों से साफ शब्दों में कहा है कि आतंकवाद को सुरक्षित माहौल देने वाले तंत्र को अब पूरी तरह से खत्म करने की जरूरत है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि Ambassador Parvathaneni Harish ने दुनिया के सामने यह बात रखी और शरण देने वाले देशों की कड़ी निंदा की है। भारत का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वैश्विक सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर गंभीर चर्चा चल रही है।
अफगान शरणार्थियों की वापसी पर भारत की चिंता
संयुक्त राष्ट्र की बैठक के दौरान भारतीय प्रतिनिधि ने अफगानिस्तान से वापस भेजे जा रहे शरणार्थियों के मुद्दे को भी उठाया। आंकड़ों के मुताबिक 2025 में कुल 2.9 मिलियन यानी करीब 29 लाख अफगानों को वापस भेजा गया और 22 अगस्त 2026 तक लगभग 1.15 मिलियन यानी 11.5 लाख और लोगों को वापस भेजा जा चुका है। इनमें से ज्यादातर लोगों की वापसी बिना उनकी मर्जी के यानी जबरन हुई है। भारत ने इस बात पर हैरानी जताई कि यदि दुनिया के किसी अन्य हिस्से में तीन मिलियन से ज्यादा लोगों को इस तरह जबरन हटाया जाता तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक हंगामा खड़ा हो जाता। भारत सरकार खुद संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और अफगान अधिकारियों के साथ मिलकर शरणार्थियों को घर, खाना और जरूरी सामान मुहैया कराने का काम कर रही है।
9/11 हमलों की याद और आतंकवाद का नेटवर्क
क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खात्मा पर बात करते हुए भारत ने 9/11 के हमलों की बरसी और उससे जुड़े इतिहास को सबके सामने रखा। अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को हुए इन हमलों में अल-कायदा के 19 आतंकियों ने चार कमर्शियल विमानों को हाईजैक किया था। इनमें से दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर्स से टकराए, तीसरा विमान वर्जीनिया के पेंटागन से टकराया और चौथा विमान पेंसिल्वेनिया के एक खेत में क्रैश हो गया था। अमेरिकी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस भयानक घटना में कुल 2,977 लोगों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद पूरी दुनिया में आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया गया था।
आतंकी सरगनाओं के खात्मा का जिक्र
भारत ने याद दिलाया कि अल-कायदा के बड़े आका किसी अनजान जंगल या गुफा में नहीं बल्कि सुरक्षित ठिकानों पर छिपे हुए थे। मास्टरमाइंड Osama bin Laden को एक सुरक्षित और पहरेदार कंपाउंड के भीतर ऑपरेशन नेपच्यून स्पीयर के तहत ढेर किया गया था। इसके अलावा मुख्य साजिशकर्ता Khalid Sheikh Mohammed एक आम रिहायशी घर में छिपा मिला था, जबकि हाईजैकिंग सेल को-आर्डिनेटर Ramzi Binalshibh शहरी केंद्र में रह रहा था। अल-कायदा के वरिष्ठ ऑपरेटिव Walid bin Attash और वित्तीय मामलों को संभालने वाला Mustafa Ahmed al-Hawsawi भी इसी तरह के सामान्य शहरी इलाकों से पकड़े गए थे।
लश्कर और जैश जैसे संगठनों पर कड़ा प्रहार
भारतीय राजनयिक ने दुनिया को चेतावनी देते हुए कहा कि जिस सुरक्षित माहौल ने 9/11 के मास्टरमाइंड्स को पनाह दी थी, वही माहौल आज भी Lashkar-e-Taiba यानी लश्कर-ए-तैबा और Jaish-e-Mohammed यानी जैश-ए-मोहम्मद जैसे खतरनाक संगठनों को लगातार पनाह दे रहा है। ये संगठन सुरक्षा परिषदों के प्रतिबंधों से बचने के लिए लगातार अपने नाम और पहचान बदल रहे हैं लेकिन इन्हें लगातार शरण मिल रही है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि इस तरह के सुरक्षित ठिकानों को खत्म करना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में किसी भी देश के मासूम नागरिकों को अपनी जान न गंवानी पड़े और आतंकवाद के इस दलदल को पूरी तरह से सुखाया जा सके।