भारत जारी रखेगा रूस से तेल आयात, पूर्व राजनयिक ने अमेरिका के नए प्रतिबंधों पर कही बड़ी बात.

भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हुए रूस और अन्य देशों से तेल का आयात जारी रखेगा। अमेरिका द्वारा हाल ही में पास किए गए प्रतिबंध कानून के बाद पूर्व वरिष्ठ राजनयिक Ashok Sajjanhar ने यह बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की 1.4 अरब जनता को सही और किफायती दामों पर लगातार ऊर्जा मिलती रहे, इसके लिए सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और बाजार की स्थिति के हिसाब से दूसरे देशों से भी तेल मंगवाने का काम जारी रहेगा।
अमेरिका के नए कानून पर क्या बोले पूर्व राजनयिक
अमेरिकी संसद ने हाल ही में Lindsey O Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 को मंजूरी दी है। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति के पास यह अधिकार होगा कि वह रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक भारी टैक्स या टैरिफ लगा सकें। सीनेट ने इस बिल को 86-11 के बहुमत से पास किया था, जिसके बाद इसे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने भी मंजूरी दे दी और अब यह राष्ट्रपति के पास है। हालांकि, पूर्व राजनयिक ने साफ किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर तुरंत टैक्स लग जाएगा, क्योंकि यह केवल राष्ट्रपति की मर्जी पर निर्भर करता है और यह नियम मुख्य रूप से चीन जैसे बड़े खरीदारों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
भारत का रूस से तेल आयात क्यों है जरूरी
आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2022 से पहले भारत रूस से बहुत कम मात्रा में तेल खरीदता था, लेकिन उसके बाद यह बढ़कर 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंच गया और पिछले कुछ महीनों यानी जुलाई और अगस्त के दौरान यह आंकड़ा बढ़कर करीब 45 प्रतिशत हो गया है। सरकार और जानकारों का मानना है कि रूस से सस्ता कच्चा तेल मिलना देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के लिए बहुत जरूरी है, ताकि घरेलू बाजार में ईंधन के दाम नियंत्रण में रहें। विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी पहले ही यह साफ कर दिया है कि देश के व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे और इस मामले पर अमेरिका के साथ उच्च स्तर पर बातचीत चल रही है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि रूस से तेल की सप्लाई में अचानक रुकावट आती है, तो पूरी दुनिया में डीजल और पेट्रोल जैसे पेट्रोलियम उत्पादों के दाम आसमान छूने लगेंगे। ऐसे में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अमेरिका सहित कई अन्य देशों से भी संपर्क बनाए हुए है। नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच इस मुद्दे पर लगातार बातचीत जारी है ताकि आपसी रिश्तों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर इसका कोई बुरा असर न पड़े।