पश्चिम एशिया में तनाव घटा तो भारतीय विमानन कंपनियों को होगा बड़ा फायदा: जेफरीज

जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी चुनाव के बाद पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से भारतीय एयरलाइंस और एयरपोर्ट्स को बड़ा लाभ मिल सकता है।

Lov Singh5 November 20262 min read0 viewsEnglish
पश्चिम एशिया में तनाव घटा तो भारतीय विमानन कंपनियों को होगा बड़ा फायदा: जेफरीज

नई दिल्ली: अमेरिकी चुनाव के बाद पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदों ने भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए नई संभावनाएं खोल दी हैं। जेफरीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक हालात सुधरते हैं, तो भारतीय एयरलाइंस और एयरपोर्ट्स इसके बड़े लाभार्थी बनकर उभर सकते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी चुनाव के बाद परिस्थितियों में बदलाव से 'एंड-ऑफ-वार ट्रेड' (युद्ध समाप्ति व्यापार) फिर से जीवित हो सकता है, जैसा कि जून के दौरान बाजार के सकारात्मक माहौल में देखा गया था। हालांकि, तनाव कम होने का रास्ता अभी भी अनिश्चित बना हुआ है।

अगर शत्रुता कम होती है, तो भारतीय एयरलाइंस को विमानन ईंधन की कीमतों में गिरावट और फ्लाइट रूट बदलने के खर्च में कमी से राहत मिलेगी। साथ ही, यात्री ट्रैफिक में सुधार होने से पिछले कई महीनों से चल रही परिचालन बाधाओं, क्षमता की कमी और हवाई किराए में बढ़ोतरी जैसी समस्याओं से निजात मिल सकती है।

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जेफरीज ने बताया कि पिछले छह महीनों से भारतीय विमानन क्षेत्र चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूटों पर उड़ानों में व्यवधान आया है। परिचालन लागत बढ़ने के कारण एयरलाइंस ने किराए बढ़ाए हैं, जिसका असर यात्रियों की मांग पर पड़ा है।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह तिमाहियों से यात्री ट्रैफिक की वृद्धि धीमी रही है और सितंबर तिमाही में कोविड-19 महामारी के बाद से सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। इसके बावजूद, भारत के होटल क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन से यह संकेत मिलता है कि यात्रा की बुनियादी मांग अभी भी स्वस्थ है।

तनाव कम होने पर एयरलाइंस अपनी फ्लाइट शेड्यूल को बहाल कर सकेंगी और परिचालन संबंधी बाधाएं दूर होंगी। इससे एयरलाइंस का ध्यान केवल महंगे किराए के जरिए मार्जिन बचाने के बजाय यात्रियों की संख्या बढ़ाने और मांग को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित हो सकेगा।

जेफरीज ने यह भी कहा कि अब तक एयरलाइंस ने ऊंचे हवाई किराए से लाभ उठाया है, जिसने ईंधन और परिचालन खर्चों की भरपाई की है। लेकिन लंबे समय तक महंगे किराए बाजार में मांग को सीमित कर सकते हैं, क्योंकि भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमतों का इस्तेमाल यात्रियों को आकर्षित करने के लिए किया जाता रहा है।

एयरपोर्ट्स के लिए भी यह स्थिति फायदेमंद होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय एयरपोर्ट्स पर रिटेल, फूड एंड बेवरेज और ड्यूटी-फ्री जैसी गैर-विमानन सेवाओं से राजस्व में अच्छी बढ़ोतरी हो रही है। यात्रियों की संख्या बढ़ने से विमानन राजस्व के साथ-साथ कमर्शियल सेवाओं की कमाई भी बढ़ेगी।

इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में स्थिरता आने से विमान लीज, रखरखाव और डॉलर में होने वाले अन्य परिचालन खर्चों में और कमी आने की संभावना है।

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